SBI का बड़ा कदम: AI से किसानों और MSME को मिलेगा ज़्यादा कर्ज़!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SBI का बड़ा कदम: AI से किसानों और MSME को मिलेगा ज़्यादा कर्ज़!

SBI के चेयरमैन CS Setty ने FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में बैंकों से कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किसानों और छोटे कारोबारों को कर्ज़ (Credit) देने के लिए ज़्यादा किया जाए। इसका मकसद ज़रूरतमंदों तक वित्तीय मदद पहुंचाना है, लेकिन इसमें साइबर सुरक्षा जैसे नए खतरे भी शामिल हैं।

AI से बढ़ेगा किसानों और छोटे कारोबारों को कर्ज़

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन CS Setty ने भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक नई रणनीति का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल सिर्फ रिटेल बैंकिंग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे किसानों और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) तक कर्ज़ (Credit) पहुंचाने के लिए और ज़्यादा सक्रियता से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

11 अगस्त, 2026 को FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए Setty ने इस बात पर ज़ोर दिया कि AI टेक्नोलॉजी का उपयोग इन ज़रूरतमंद क्षेत्रों तक वित्तीय पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिलहाल, बैंक AI का इस्तेमाल कस्टमर सर्विस बेहतर बनाने और व्यक्तिगत रिटेल लोन के फैसलों को तेज़ करने के लिए कर रहे हैं। लेकिन Setty के अनुसार, अब विकास का अगला पड़ाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लक्षित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन सेक्टर्स की सेवा के लिए AI का उपयोग भारत के 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के लिए एक ज़रूरी कदम है। इस घोषणा के समय बैंक के शेयर लगभग ₹1,064 पर ट्रेड कर रहे थे।

कैसे होगा यह संभव?

Setty ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी और डिजिटल रिकॉर्ड्स जैसे एडवांस्ड टूल्स के इस्तेमाल पर ज़ोर दिया। इन टेक्नोलॉजीज़ की मदद से बैंक ऐसे किसानों और छोटे कारोबारियों की कर्ज़ की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, जिनके पास पारंपरिक वित्तीय इतिहास (financial history) नहीं है। इन डेटा पॉइंट्स का उपयोग करके, बैंक ज़्यादा सटीक कर्ज़ (lending) के फैसले ले सकते हैं। इससे बैड लोंस का खतरा कम होगा और अर्थव्यवस्था के इन ज़रूरी हिस्सों में पैसे का फ्लो बढ़ेगा।

साइबर सुरक्षा का बड़ा खतरा

हालांकि, इस तेज़ तकनीकी बदलाव के साथ बड़े खतरे भी जुड़े हैं। Setty ने आगाह किया कि जैसे-जैसे बैंक ज़्यादा AI अपनाएंगे, उन्हें अपनी साइबर सुरक्षा (cybersecurity) को भी मज़बूत करना होगा। उन्होंने बताया कि नई टेक्नोलॉजी अक्सर ज़्यादा खतरनाक साइबर खतरों और धोखाधड़ी के लिए नए रास्ते खोलती है, जो मौजूदा सुरक्षा प्रणालियों की क्षमता से तेज़ हो सकते हैं। यह खतरा सिर्फ तकनीकी उल्लंघनों (technical breaches) तक ही सीमित नहीं है; बैंकों को AI मॉडल के निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को भी पारदर्शी (transparent) और ज़िम्मेदार (responsible) बनाना होगा।

निवेशकों के लिए, यह बदलाव यह संकेत देता है कि बैंकों को इन नए AI सिस्टम्स को सपोर्ट करने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विशेष प्रतिभा (specialized talent) पर ज़्यादा खर्च करना पड़ सकता है। इन प्रोजेक्ट्स को पायलट टेस्ट से निकालकर रोज़मर्रा की लैंडिंग में सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण फैक्टर होगी। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक डेटा का कुशलता से उपयोग कैसे करते हैं, साथ ही जोखिमों पर मज़बूत नियंत्रण बनाए रखते हैं, ताकि टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने की दौड़ में वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा से समझौता न हो।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.