SBI के चेयरमैन सेट्टी ने Clearing Corporation of India Limited (CCIL) की 25वीं सालगिरह पर कहा कि भविष्य में तरक्की के लिए 'इंटेलिजेंट स्केल' ज़रूरी है, न कि सिर्फ़ आकार बढ़ाना। उन्होंने बताया कि AI, बढ़ती जटिलताओं और जोखिमों को संभालने में अहम भूमिका निभाएगा, जिससे रिस्क मैनेजमेंट, ऑपरेशनल एफिशिएंसी और रियल-टाइम मार्केट निगरानी में सुधार होगा।
भारत के बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र में AI पर खर्च 2026 तक दोगुना होने की उम्मीद है। भारतीय AI इन फाइनेंस मार्केट के 2032 तक $9.6 बिलियन से ज़्यादा होने का अनुमान है। हालांकि, डेटा प्राइवेसी और कुशल लोगों की कमी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। SBI की बात करें तो, कंपनी का P/E रेश्यो 11.79x है, जो इंडस्ट्री एवरेज 12x से थोड़ा कम है। ₹10.26 ट्रिलियन की मार्केट कैप वाली SBI का नेट NPA रेश्यो 1.57% है और एनालिस्ट्स इसे ₹1,280 तक जाने की उम्मीद कर रहे हैं।
दूसरी ओर, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने फॉरेक्स बाज़ार में थोड़ी नरमी लाते हुए ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) ट्रेडिंग पर लगी पाबंदियों को आंशिक रूप से हटा दिया है। यह बदलाव 20 अप्रैल, 2026 से लागू होगा और 1 अप्रैल, 2026 को लगाए गए प्रतिबंधों को वापस लेगा। इसका मकसद बाज़ार की अस्थिरता को नियंत्रित करना और लिक्विडिटी बनाए रखना है।
ऑथराइज्ड डीलर्स अब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को रीबुक या कैंसिल कर सकेंगे। RBI का मानना है कि भारतीय रुपये पर तत्काल दबाव कम हो गया है, जिससे सट्टेबाजी को ज़्यादा मौका दिए बिना हेजिंग एक्टिविटीज़ को फिर से शुरू किया जा सकेगा। RBI ने ऑनशोर मार्केट में नेट ओपन पोज़िशन्स पर $100 मिलियन की कैप भी बनाए रखी है।
AI को लेकर SBI का विजन और RBI की NDF नीतियां, भारत के वित्तीय क्षेत्र के परिपक्व होने का संकेत देती हैं। यह क्षेत्र टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि RBI बाज़ार को स्थिर रखने के लिए लचीली नीतियां अपना रही है। हालांकि, भारतीय रुपया अभी भी इस साल एशिया में सबसे कमजोर बना हुआ है, जो बाहरी कमजोरियों को दर्शाता है। AI को अपनाने में असमानता भी एक बड़ी चुनौती है।
