डिजिटल खर्च से क्रेडिट कार्ड मार्केट में तेज़ी
भारत का क्रेडिट कार्ड मार्केट FY26 में ₹23.62 ट्रिलियन के आंकड़े तक पहुंचा, जो उपभोक्ताओं की बदलती आदतों और डिजिटल भुगतान को अपनाने का साफ संकेत है। इस दौरान 118.6 मिलियन से ज़्यादा कार्ड चलन में थे। डिजिटल लेनदेन खुदरा खर्च का 62.5% बन चुका है, जिससे रोजमर्रा की खरीददारी और बड़ी खरीदारी दोनों में ऑनलाइन तरीके ज़्यादा लोकप्रिय हो गए हैं। SBI Card ने भी इस डिजिटल क्रांति में अहम भूमिका निभाई है, जिसके रिटेल खर्च में पिछले साल के मुकाबले 15% की ज़बरदस्त वृद्धि होकर यह ₹3.54 ट्रिलियन पर पहुँच गया। इस मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, SBI Card के शेयर पिछले एक साल में करीब 31.58% गिरकर ₹624 के स्तर पर आ गए हैं (18 मई 2026 तक)।
UPI इंटीग्रेशन और छोटे शहरों की ग्रोथ से बढ़ा इस्तेमाल
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के साथ तेज़ी से बढ़ रहा है। इसके चलते RuPay, भारत के घरेलू कार्ड नेटवर्क, का दबदबा बढ़ा है। अनुमान है कि 2025 के अंत तक UPI के ज़रिए होने वाले क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन का 38-40% RuPay पर हुआ, और अब यह कुल क्रेडिट कार्ड मार्केट का करीब 16-18% हिस्सा रखता है। यह बदलाव अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्कों के लिए एक चुनौती है। छोटे शहरों (Tier 2/3) में भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है, जहाँ 77% UPI क्रेडिट कार्ड यूज़र्स और 81% खर्च होता है। पिछले तिमाही में इन शहरों में किराना (groceries) और फ्यूल जैसे क्षेत्रों में UPI-लिंक्ड कार्ड से खर्च 10% बढ़ा है। EMI पर सामान खरीदने का चलन भी तेज़ी से बढ़ा है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीज़ों के लिए। हालांकि, नए कार्ड जारी करने की रफ़्तार धीमी हुई है, जो FY24 में 19% थी, वह FY26 में घटकर करीब 8% रह गई है। अब कंपनियाँ क्रेडिट क्वालिटी पर ज़्यादा ध्यान दे रही हैं, जिससे ग्रोथ सामान्य स्तर पर लौट रही है।
चुनौतियाँ: प्रतिस्पर्धा और रेगुलेशन
कुल खर्च में बढ़ोतरी के बावजूद, SBI Card को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सालाना खर्च में वृद्धि धीमी होकर FY26 में लगभग 12% रह गई है, जो पहले के दौर से कम है। कंपनियाँ अब क्रेडिट क्वालिटी को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे नए कार्ड जारी करने की गति धीमी हो गई है। 2024-25 में असुरक्षित लोन (unsecured loans) में बकाए (delinquencies) बढ़ने की चिंताएँ क्रेडिट कार्ड कंपनियों के लिए गंभीर हैं। मार्केट में ज़बरदस्त मुकाबला है, जहाँ टॉप पाँच कंपनियाँ 80% से ज़्यादा खर्च को कंट्रोल करती हैं। SBI Card, जिसके पास फरवरी 2026 तक लगभग 19% मार्केट शेयर था, HDFC Bank (22%), ICICI Bank (16%), और Axis Bank (14%) जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर ले रहा है। UPI-लिंक्ड RuPay कार्ड की बढ़ती लोकप्रियता पारंपरिक कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए एक चुनौती पेश कर रही है, जिससे रेवेन्यू पर असर पड़ सकता है। रेगुलेटरी निगरानी भी सख़्त हुई है, जहाँ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अब क्रेडिट लिमिट बढ़ाने और ओवर-लिमिट चार्जेस के लिए ज़्यादा सख़्त ग्राहक सहमति (customer consent) की मांग कर रहा है। SBI Card ने Q4 FY26 के लिए ₹609 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो 14% ज़्यादा है, लेकिन नतीजों के बाद इसके शेयरों में मामूली गिरावट देखी गई, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाता है। स्टॉक का P/E रेश्यो करीब 27-29.7 बताता है कि ग्रोथ की उम्मीदें अभी भी हैं, लेकिन क्रेडिट मैनेजमेंट या प्रतिस्पर्धा में जोखिम इसके वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकते हैं।
SBI Card का भविष्य
विश्लेषकों (Analysts) का SBI Card पर मिली-जुली राय है, जिसमें 12 महीने के लिए औसत प्राइस टारगेट ₹655 से ₹742 के बीच है। कंपनी की CEO, Salila Pande, ने कहा है कि कंपनी का फोकस पार्टनरशिप और इनोवेशन पर है ताकि वे भारत के डिजिटल पेमेंट मार्केट में बदलते ग्राहकों की ज़रूरतों को पूरा कर सकें। SBI Card की भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह छोटे शहरों में अपने बढ़ते ग्राहक आधार का कैसे फायदा उठाती है, डिजिटल पेमेंट को भुनाती है, और रेगुलेटरी मांगों तथा UPI-लिंक्ड विकल्पों से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा से कैसे निपटती है, साथ ही क्रेडिट रिस्क कंट्रोल को मज़बूत बनाए रखती है।