SBI Card: ₹1,800 करोड़ बैड लोन बेचे, क्या यह बड़ी चिंता की बात है?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SBI Card: ₹1,800 करोड़ बैड लोन बेचे, क्या यह बड़ी चिंता की बात है?
Overview

SBI Cards ने **₹1,800 करोड़** के खराब क्रेडिट कार्ड लोन (bad credit card loans) को Integro Finserv को बेच दिया है। इस सौदे का मकसद बढ़ते डिफ़ॉल्ट (defaults) को काबू करना और SBI Card के लोन पोर्टफोलियो की क्वालिटी को बेहतर बनाना है।

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SBI Card का बड़ा कदम: NPA पोर्टफोलियो को बेचा

SBI Cards and Payment Services ने अपना लगभग ₹1,800 करोड़ का खराब क्रेडिट कार्ड लोन पोर्टफोलियो Integro Finserv को बेच दिया है। यह कदम कंपनी के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यह बढ़ते डिफ़ॉल्ट को मैनेज करने और अपने लोन बुक की क्वालिटी को सुधारने में मदद करेगा।

कंपनी की सेहत में सुधार, पर चुनौतियां बरकरार

इस ट्रांज़ैक्शन (transaction) के बावजूद, कंपनी ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक उसका ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) रेश्यो सुधरकर 2.41% हो गया है, जो पिछले साल 3.08% था। नेट NPA भी 1.04% पर आ गया, जो पहले 1.46% था। ये आंकड़े कंपनी के अंदरूनी सुधार को दिखाते हैं, लेकिन क्रेडिट कार्ड सेक्टर की मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं।

खरीदार कौन है: Integro Finserv

खरीदार Integro Finserv है, जो मुंबई स्थित एक नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) है और 2019 में बनी थी। यह कंपनी डिस्ट्रेस्ड रिटेल लोन (distressed retail loans) खरीदने, लीगल तरीके से उन्हें सुलझाने और फिर से लोन देने में माहिर है।

रिकवरी रेट्स कम, सेक्टर में बढ़ी दिक्कतें

हालांकि, उधारीदाताओं (lenders) की बैलेंस शीट साफ करने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन स्ट्रेस्ड रिटेल क्रेडिट कार्ड लोन से रिकवरी रेट (recovery rates) काफी कम, करीब 15% ही है। यह बैंकिंग सेक्टर के ओवरऑल NPA रिकवरी रेट (जो 2025 में करीब 18% था, और Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) जैसे चैनल से 36.6% तक) से काफी कम है। इससे पता चलता है कि क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट को सुलझाना ज्यादा मुश्किल है। भारत का क्रेडिट कार्ड मार्केट, जिसमें 2025 के अंत तक 113 मिलियन से ज्यादा एक्टिव कार्ड थे, राष्ट्रीय स्तर पर डिफॉल्ट दरों में वृद्धि देख रहा है, जो 2025 में औसतन 1.8% रही। क्रेडिट कार्ड पर कुल बकाया ड्यूज (outstanding dues) चार साल में दोगुने से ज्यादा होकर जुलाई 2025 तक ₹2.91 लाख करोड़ तक पहुंच गए।

मार्केट शेयर और एनालिस्ट की राय

SBI Card की मार्केट में करीब 19-20% हिस्सेदारी है, जो इसे HDFC Bank (लगभग 22-23%) के बाद दूसरा सबसे बड़ा इश्यूअर (issuer) बनाता है। ICICI Bank और Axis Bank भी महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। SBI Card, HDFC Bank (19.4x) और ICICI Bank (19.0x) जैसे पीयर्स (peers) की तुलना में करीब 30.51x के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है। एनालिस्ट (analysts) SBI Card को लेकर सतर्क हैं, आम राय 'Sell' की है। टारगेट प्राइस में संभावित अपसाइड (upside) दिख रहा है, लेकिन क्रेडिट रिस्क और इंटेंस कंपटीशन को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

क्रेडिट रिस्क: बड़ी चुनौती

SBI Card के लिए मुख्य समस्या तेजी से बढ़ते क्रेडिट कार्ड सेगमेंट में इनहेरेंट क्रेडिट रिस्क (inherent credit risk) है। खराब रिटेल लोन पर कम रिकवरी रेट, लगभग 15%, इन एसेट्स (assets) को सुलझाने की कठिनाई को दिखाता है। बढ़ते डिफॉल्ट रेट्स और इंटेंस कंपटीशन के साथ, यह प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव डालता है। SBI Card के हालिया NPA आंकड़े सुधार दिखा रहे हैं, लेकिन ₹1,800 करोड़ की यह बड़ी बिक्री बताती है कि एसेट क्वालिटी का खराब होना एक लंबी अवधि की चुनौती हो सकती है। 30 से ऊपर का P/E रेश्यो बताता है कि स्टॉक की मौजूदा कीमत शायद क्रेडिट स्ट्रेन और इसे मैनेज करने की लागत को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.