मई 2026 में क्रेडिट कार्ड इंडस्ट्री में बंपर ग्रोथ देखने को मिली है, जिसमें SBI Card ने सबसे ज़्यादा नए कार्ड जारी किए हैं। इस दौरान कुल 181,851 नए कार्ड इश्यू हुए। पूरे सेक्टर में करीब 10 लाख नए कार्ड जुड़े, जिससे कुल कार्ड बेस 120.45 मिलियन तक पहुंच गया। वहीं, क्रेडिट कार्ड से कुल खर्च 2.02 लाख करोड़ रुपये रहा।
क्या हुआ?
मई 2026 में क्रेडिट कार्ड इंडस्ट्री ने लगातार ग्रोथ बनाए रखी और करीब 10 लाख नए कार्ड जोड़े गए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लेटेस्ट आंकड़ों के मुताबिक, देश में एक्टिव क्रेडिट कार्डों की कुल संख्या बढ़कर 120.45 मिलियन हो गई है। SBI Card ने इस महीने 181,851 नए कार्ड जोड़कर सेक्टर में अपनी लीड बनाए रखी। इससे कंपनी का कुल कार्ड बेस लगभग 22.42 मिलियन तक पहुंच गया। यह डेटा ग्राहकों की क्रेडिट की मांग और प्रमुख बैंकों के बीच मार्केट शेयर की लड़ाई की तस्वीर दिखाता है।
मार्केट शेयर की जंग
भारत का क्रेडिट कार्ड मार्केट काफी कॉम्पिटिटिव है, जहां बड़े बैंक नए ग्राहकों को लुभाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। SBI Card के बाद, ICICI Bank दूसरे नंबर पर रहा, जिसने 168,344 नए कार्ड जोड़े और कुल 19.4 मिलियन का आंकड़ा पार किया। देश के सबसे बड़े कार्ड इश्यूअर, HDFC Bank ने 142,297 नए कार्ड जोड़कर अपना बेस 26.58 मिलियन तक पहुंचाया। Axis Bank ने भी 52,328 कार्ड जोड़कर 16.14 मिलियन का टोटल बेस बनाया।
मिड-साइज़ बैंकों ने भी आक्रामक ग्रोथ स्ट्रेटेजी अपनाई है। IDFC First Bank और Federal Bank ने क्रमशः 87,227 और 106,861 नए कार्ड जोड़कर अच्छी पकड़ दिखाई है। निवेशकों के लिए, यह डेटा यह समझने में मदद करता है कि कौन से बैंक नए ग्राहक बनाने में सफल हो रहे हैं और कौन अपनी मौजूदा मार्केट पोजीशन बनाए हुए हैं।
कंज्यूमर खर्च का ट्रेंड
मई 2026 में देश में क्रेडिट कार्ड से कुल खर्च ₹2.02 ट्रिलियन (₹2.02 लाख करोड़) तक पहुंच गया। यह पिछले महीने यानी अप्रैल की तुलना में 2.54% और पिछले साल मई की तुलना में 2.56% की बढ़ोतरी दर्शाता है। हालांकि, यह खर्च अभी भी मार्च 2026 के पीक लेवल ₹2.19 ट्रिलियन (₹2.19 लाख करोड़) तक वापस नहीं पहुंचा है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म कुल खर्च का ₹1.26 ट्रिलियन (₹1.26 लाख करोड़) का हिसाब रखते हैं, जबकि पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) ट्रांजैक्शन ₹76,095 करोड़ रहे।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
निवेशकों के लिए, क्रेडिट कार्ड बिजनेस बैंकों के लिए फी-बेस्ड इनकम का एक बड़ा ज़रिया है। हालांकि, इस सेक्टर में कुछ खास बातें हैं जिन पर गौर करना ज़रूरी है। पहला, रेगुलेटर (RBI) पहले ही अनसिक्योर्ड लेंडिंग (जिसमें क्रेडिट कार्ड शामिल हैं) की तेज ग्रोथ को लेकर चिंता जता चुका है। अगर RBI भविष्य में रिस्क वेट (Risk Weight) या कैपिटल रिक्वायरमेंट (Capital Requirement) में कोई बदलाव करता है, तो इन पोर्टफोलियो की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ सकता है।
दूसरा, कार्ड काउंट में ग्रोथ पॉजिटिव है, लेकिन इन एसेट्स (Assets) की क्वालिटी बहुत महत्वपूर्ण है। निवेशकों को बैंकों के नतीजों में बैड लोन (Bad Loans) या डिफॉल्ट (Defaults) में किसी भी बढ़ोतरी पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि आक्रामक कार्ड इश्यूएंस (Issuance) कभी-कभी क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) को छिपा सकता है। अंत में, चूंकि खर्च की ग्रोथ सिंगल डिजिट में बनी हुई है, इसलिए ग्राहकों के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इन बैंकों की प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) बनाए रखने की क्षमता अगले कुछ तिमाहियों में देखने लायक होगी।
