गुरुवार को इंडियन रुपया डॉलर के मुकाबले **24 पैसे** चढ़कर **94.92** के स्तर पर पहुंच गया है। ग्लोबल स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट से रुपये को सहारा मिला है, जबकि RBI का लगातार दखल वोलेटिलिटी को कम करने में मददगार साबित हो रहा है।
रुपये में रिकवरी के पीछे के बड़े कारण
रुपये की इस रिकवरी के पीछे दो मुख्य फैक्टर काम कर रहे हैं। पहला, ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट। भारत अपनी तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल सस्ता होने से डॉलर की मांग कम हो जाती है और रुपये पर दबाव घटता है। ब्रेंट क्रूड इस समय $104.41 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो हालिया ऊंचाई $106.11 से काफी नीचे है।
दूसरा कारण है अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में ठहराव। जब यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर अमेरिकी एसेट्स में लगाने लगते हैं, जिससे रुपया कमजोर होता है। अब इस यील्ड के कूल-ऑफ होने से रुपये को सांस लेने का मौका मिला है।
RBI की भूमिका और आगे की राह
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने करेंसी में भारी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए अपनी सक्रियता बनाए रखी है। सरकारी बैंक तेल मार्केटिंग कंपनियों के लिए डॉलर बेच रहे हैं, जिससे डॉलर की अतिरिक्त मांग को सोखने में मदद मिल रही है।
तकनीकी मोर्चे पर, 95 प्रति डॉलर के स्तर पर अभी भी कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपया 94.75 से 95.75 के दायरे में ट्रेड कर सकता है। अब बड़े ट्रेडर्स की नजर इस बात पर है कि क्या RBI रुपये को 95 के नीचे बनाए रखने में सफल होगा या आगे कोई और बड़ा एक्शन लिया जाएगा। इस अनिश्चितता के बीच, विदेशी व्यापार से जुड़ी कंपनियां अपनी हेजिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव कर रही हैं।
