सोमवार को भारतीय रुपया मजबूती दिखाते हुए **95.17** के स्तर पर बंद हुआ। विदेशी फंड के लगातार फ्लो और रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बाजार में दखल दिए जाने के अनुमानों ने रुपये को सहारा दिया है।
सोमवार के कारोबारी सत्र में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.17 पर बंद हुआ। हालांकि ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में 3.70% की उछाल देखी गई और ब्रेंट क्रूड $91.36 प्रति बैरल तक पहुंच गया, इसके बावजूद भारतीय करेंसी ने मजबूती दिखाई।
बाजार का गणित
आमतौर पर क्रूड ऑयल महंगा होने से रुपया कमजोर होता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही। FCNR(B) स्कीम के तहत $73 अरब का डिपॉजिट और MSCI इंडेक्स की रीबैलेंसिंग के चलते बाजार में पर्याप्त डॉलर लिक्विडिटी बनी रही। दूसरी ओर, भारतीय इक्विटी मार्केट में बिकवाली का माहौल था और सेंसेक्स 307 अंक फिसलकर 76,957.27 पर बंद हुआ, फिर भी रुपये का प्रदर्शन बेहतर रहा।
निवेशकों पर क्या असर?
रुपये के इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर कंपनियों पर पड़ता है:
- फायदा: जो कंपनियां कच्चा माल इम्पोर्ट करती हैं, जैसे ऑयल मार्केटिंग फर्में, उन्हें रुपये की मजबूती से फायदा होगा।
- नुकसान: IT और फार्मा जैसे एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा डॉलर में होता है।
आने वाले समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर नीति और ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।
