आज क्या हुआ?
BSE से Rich Field Financial Services Limited (RFSL) को कंपनी के प्रस्तावित Preferential Issue के लिए 'in-principle' अप्रूवल मिल गया है। कंपनी 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 34,42,000 इक्विटी शेयर जारी करने का प्लान बना रही है। इश्यू प्राइस ₹25 प्रति शेयर रखा गया है, जो प्रमोटर और नॉन-प्रमोटर दोनों कैटेगरी के लिए है।
यह अप्रूवल एक अहम कदम है, जो एक्सचेंज द्वारा प्रपोजल को शुरुआती स्वीकृति दिखाता है। हालांकि, यह SEBI (Issue of Capital and Disclosure Requirements) Regulations, 2018, और SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015, सहित कई नियमों और रेग्युलेटरी ज़रूरतों के पालन पर निर्भर है।
यह क्यों मायने रखता है?
यह Preferential Issue RFSL के लिए एक बड़ा कदम है क्योंकि कंपनी अपनी फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत करने और बिजनेस एक्टिविटीज़ को फंड करने के लिए कैपिटल जुटाना चाहती है। ऐसे कैपिटल इंफ़्यूज़न NBFCs के ऑपरेशनल एक्सपेंशन, लेंडिंग एक्टिविटीज़ और ओवरऑल ग्रोथ स्ट्रेटेजीज़ को सपोर्ट कर सकते हैं। यह कंपनी की कैपिटल स्ट्रक्चर और शेयरहोल्डिंग पैटर्न में भी बदलाव ला सकता है।
इन्वेस्टर्स के लिए, यह मैनेजमेंट की बिजनेस ग्रोथ की मंशा को दिखाता है। लेकिन, Preferential अलॉटमेंट की प्रक्रिया में कई रेगुलेटरी जांच और संतुलन शामिल होते हैं, और फाइनल लिस्टिंग सभी शर्तों को पूरा करने पर निर्भर करती है।
कंपनी का बैकग्राउंड
Kolkata-बेस्ड NBFC, Rich Field Financial Services, जिसकी शुरुआत 1992 में हुई थी, लेंडिंग और इन्वेस्टमेंट एक्टिविटीज़ सहित डायवर्सिफाइड फाइनेंशियल सर्विसेज में एक्टिव है। कंपनी का कैपिटल जुटाने का इतिहास रहा है। जून 2021 में प्रमोटर्स ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक ओपन ऑफर चलाया था। हाल ही में, RFSL ने नवंबर 2025 में एक Preferential Issue का प्रस्ताव दिया था, जिसे बाद में शेयर की संख्या और इश्यू साइज़ के मामले में ₹10 करोड़ से घटाकर ₹8.6 करोड़ कर दिया गया था।
RFSL ने हाल ही में Q2 FY2025-26 के मजबूत नतीजे पेश किए हैं, जिसमें साल-दर-साल रेवेन्यू में बढ़ोत्तरी और पॉजिटिव अर्निंग्स पर शेयर (EPS) दर्ज किया गया है। अगस्त 2025 में, कंपनी ने Preferential बेसिस पर नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के ज़रिए ₹8.63 करोड़ सफलतापूर्वक जुटाए थे, जो इसके कैपिटल बेस को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाता है।
अब क्या बदलेगा?
- कैपिटल इंफ़्यूज़न: Preferential Issue के सफल समापन से RFSL में लगभग ₹8.6 करोड़ आएंगे, जिससे इसके फाइनेंशियल रिसोर्सेज मजबूत होंगे।
- शेयरहोल्डिंग पैटर्न: नए शेयर अलॉटमेंट से कंपनी की शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर में बदलाव आने की उम्मीद है, जिससे मौजूदा होल्डिंग्स में डाइल्यूशन (dilution) हो सकता है और प्रमोटर बनाम पब्लिक ओनरशिप का अनुपात बदल सकता है।
- बैलेंस शीट एनहांसमेंट: जुटाई गई रकम को बिजनेस एक्टिविटीज़, लेंडिंग और ऑपरेशनल एक्सपेंशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसा कि प्लान किया गया है।
- रेग्युलेटरी कंप्लायंस: कंपनी को बाकी रेगुलेटरी अप्रूवल और कंप्लायंस ज़रूरतों, जिसमें SEBI और LODR रेगुलेशन शामिल हैं, को पूरा करना होगा।
ध्यान रखने योग्य जोखिम
- कंडीशनल अप्रूवल: BSE का अप्रूवल 'in-principle' है और फाइनल लिस्टिंग परमिशन पर निर्भर है। RFSL या अलॉटीज़ द्वारा SEBI (ICDR) रेगुलेशन या LODR रेगुलेशन का कोई भी नॉन-कंप्लायंस पेनल्टी या अप्रूवल वापस लेने का कारण बन सकता है।
- एक्जीक्यूशन रिस्क: RFSL को अलॉटीज़ से यह अंडरटेकिंग लेनी होगी कि वे कंपनी के स्क्रिप्ट में इंट्रा-डे ट्रेडिंग नहीं करेंगे। अलॉटमेंट के 20 दिनों के भीतर लिस्टिंग के लिए अप्लाई करने में फेल होने पर जुर्माना लगेगा।
- BSE की निगरानी: BSE अपने 'in-principle' अप्रूवल को किसी भी सबमिट की गई जानकारी के गलत या भ्रामक पाए जाने पर वापस लेने का अधिकार रखता है।
- संभावित मुकदमेबाजी: हालांकि अभी कोई खास पिछली मुकदमेबाजी नहीं पाई गई है, 'Litigation Search Report' की उपलब्धता कानूनी मामलों में निरंतर ड्यू डिलिजेंस की आवश्यकता का संकेत देती है।
पीयर कंपेरिजन
Rich Field Financial Services भारत में कॉम्पिटिटिव NBFC और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में काम करती है। प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में Anupam Finserv Ltd., Ken Financial Services Ltd., और Shreevatsaa Finance and Leasing Ltd. जैसी लिस्टेड कंपनियां शामिल हैं, जो इसी तरह की लेंडिंग और फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन एक्टिविटीज़ में लगी हुई हैं। JIO Financial Services और Chola Investment & Finance जैसी बड़ी एंटिटीज़ भी इस लैंडस्केप में महत्वपूर्ण प्लेयर्स हैं। ये कंपनियां अक्सर अपने विकास को फंड करने और अपनी सर्विस ऑफरिंग का विस्तार करने के लिए विभिन्न इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से कैपिटल रेज़ करती हैं।
मुख्य मेट्रिक्स
- संभावित फंड रेज़: लगभग ₹8.6 करोड़ (₹25 प्रति शेयर के मिनिमम प्राइस पर 34,42,000 शेयर जारी करने के आधार पर)।
- जारी किए जाने वाले शेयर: 34,42,000 इक्विटी शेयर।
- मिनिमम इश्यू प्राइस: ₹25 प्रति शेयर।
आगे क्या देखें?
- अलॉटमेंट का पूरा होना: RFSL को पहचाने गए प्रमोटर्स और नॉन-प्रमोटर्स को शेयरों का फाइनल अलॉटमेंट करना होगा।
- लिस्टिंग एप्लीकेशन: कंपनी को अलॉटमेंट की तारीख के 20 दिनों के भीतर स्टॉक एक्सचेंज के साथ लिस्टिंग परमिशन के लिए अप्लाई करना होगा।
- SEBI कंप्लायंस: पूरी प्रक्रिया के दौरान SEBI के ICDR और LODR रेगुलेशन का लगातार पालन।
- शेयरहोल्डिंग पैटर्न में बदलाव: अलॉटमेंट और लिस्टिंग के बाद फाइनल शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर की निगरानी।
- फंड्स का उपयोग: ट्रेस करना कि जुटाई गई कैपिटल का बिजनेस एक्सपेंशन और लेंडिंग एक्टिविटीज़ के लिए कैसे उपयोग किया जाता है।