यूके की मशहूर फिनटेक कंपनी Revolut भारत में फुल बैंकिंग लाइसेंस हासिल करने पर विचार कर रही है। फिलहाल कंपनी यहां PPI और AD-II लाइसेंस के जरिए क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस की सुविधा दे रही है, लेकिन अब वह अपने विस्तार के लिए बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है।
भारत में बड़े विस्तार की योजना
Revolut India अपने भारतीय ऑपरेशंस को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कोई डेडलाइन तय नहीं की है, लेकिन उन्होंने माना है कि भारत में फुल बैंकिंग सर्विसेज देना उनका एक प्रमुख लॉन्ग-टर्म गोल है। वे भारतीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को बारीकी से समझने के बाद ही कोई बड़ा कदम उठाएंगे।
अभी क्या है मौजूदा स्थिति?
फिलहाल, Revolut भारत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा दिए गए खास लाइसेंस के साथ काम कर रही है:
- PPI लाइसेंस: इसके जरिए कंपनी डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड जैसी सेवाएं देती है।
- AD-II लाइसेंस: यह लाइसेंस कंपनी को क्रॉस-बॉर्डर रेमिटेंस और मल्टी-करेंसी फॉरेक्स कार्ड सर्विसेज देने की अनुमति देता है, जो अभी इनके बिजनेस का मुख्य आधार है।
क्यों है यह चुनौती भरा?
ग्लोबल स्तर पर, Revolut ने मार्च 2026 में यूके में बैंकिंग लाइसेंस हासिल किया था और 2025 में कंपनी ने शानदार फाइनेंशियल ग्रोथ दिखाई थी। लेकिन भारत का बाजार यूके से काफी अलग है। यहां का बैंकिंग सेक्टर बेहद रेगुलेटेड है। RBI के सख्त नियमों के चलते, बैंकिंग लाइसेंस पाने के लिए कंपनी को कैपिटल रिक्वायरमेंट्स, गवर्नेंस और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स के कड़े पैमानों पर खरा उतरना होगा।
इसके अलावा, भारतीय बाजार में पहले से ही कई बैंक और फिनटेक कंपनियां अपनी जगह बना चुकी हैं, जिससे मुकाबला काफी कड़ा है। Revolut का फोकस अभी अपने इंटरनेशनल रेमिटेंस प्रोडक्ट्स पर है, ताकि वे बेहतर फॉरेक्स रेट्स दे सकें। फिलहाल Revolut एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए निवेशक सीधे तौर पर इसमें हिस्सेदारी नहीं ले सकते, लेकिन फिनटेक सेक्टर में यह एक बड़ा डेवलपमेंट माना जा रहा है।
