बड़े रिटेलर्स अब महंगे क्रेडिट कार्ड के बजाय UPI ट्रांजेक्शन को प्रमोट कर रहे हैं। Croma जैसे ब्रांड्स **0.4%** की नई मर्चेंट फीस के प्रभाव को कम करने और अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए ग्राहकों को UPI के प्रति प्रोत्साहित कर रहे हैं।
भारतीय रिटेलर्स अब डिजिटल पेमेंट को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहे हैं। हाई-वैल्यू UPI ट्रांजेक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद, बड़ी रिटेल चेन अब क्रेडिट कार्ड और EMI स्कीमों पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश में हैं। भले ही यह नई फीस एक अतिरिक्त खर्च है, लेकिन रिटेलर्स इसे UPI की ओर शिफ्ट होने के एक मौके के रूप में देख रहे हैं, जो पारंपरिक कार्ड पेमेंट की तुलना में अब भी काफी सस्ता है।
कॉस्ट एफिशिएंसी की रणनीति
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे बड़े रिटेल सेक्टर्स में सेल्स का 55% से 60% हिस्सा अक्सर क्रेडिट कार्ड और EMI के जरिए आता है। टाटा ग्रुप के Croma का संचालन करने वाली Infiniti Retail के लिए यह एक बड़ा हिस्सा है। कार्ड ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट को 1.5% से 3% तक का शुल्क देना पड़ता है, जबकि UPI पर यह महज 0.4% है। रिटेलर्स अब अपने मार्केटिंग बजट का इस्तेमाल कार्ड्स के बजाय UPI ट्रांजेक्शन पर कैशबैक और रिवॉर्ड्स देने के लिए कर रहे हैं, ताकि ग्राहकों का व्यवहार बदला जा सके।
टेक्नोलॉजी और कॉम्पिटिशन
इस बदलाव के साथ ही पेमेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस की मांग भी बढ़ गई है। Innoviti Technologies जैसी कंपनियां अब ऐसे राउटिंग सिस्टम दे रही हैं, जो ऑटोमैटिक तरीके से सबसे सस्ते पेमेंट चैनल को चुनते हैं। इस होड़ में अब बैंक भी अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए रिटेलर्स को 0.4% से भी कम के खास रेट्स ऑफर करने की तैयारी में हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम और निगरानी
निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ग्राहक क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड्स और बिना ब्याज वाली EMI छोड़कर UPI पर शिफ्ट होते हैं या नहीं। अगर रिटेलर्स इस ट्रांजिशन में सफल नहीं हुए, तो कन्वर्जन रेट पर असर पड़ सकता है। रिटेलर्स के लिए चुनौती लागत कम करने और ग्राहकों की सुविधा बनाए रखने के बीच संतुलन बिठाने की है।
