State Bonds: रिटेल निवेशकों की बंपर कमाई! फिक्स्ड डिपॉजिट छोड़ अब इन बॉन्ड्स में लगा रहे हैं पैसा, मिल रहा है 9.15% तक यील्ड

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AuthorMehul Desai|Published at:
State Bonds: रिटेल निवेशकों की बंपर कमाई! फिक्स्ड डिपॉजिट छोड़ अब इन बॉन्ड्स में लगा रहे हैं पैसा, मिल रहा है 9.15% तक यील्ड

भारतीय रिटेल निवेशक अब फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) और म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) से हटकर सरकारी बॉन्ड्स की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है, जो 2022 के अंत से करीब 9 गुना बढ़ गई है। निवेशक स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDL) और स्टेट-गारंटीड बॉन्ड्स को चुन रहे हैं, जो अक्सर पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट से बेहतर यील्ड (Yield) दे रहे हैं।

Detailed Coverage

सरकारी बॉन्ड्स में क्यों बढ़ रही है दिलचस्पी?

RBI के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म पर निवेशकों की संख्या अक्टूबर 2022 के लगभग 71,000 से बढ़कर जून 2026 तक 6.43 लाख से अधिक हो गई है। इस बड़े उछाल की मुख्य वजह है ज्यादा यील्ड की तलाश और सरकारी सिक्योरिटीज तक आसान डिजिटल पहुंच।

सरकारी बॉन्ड्स के विकल्प

फिलहाल निवेशकों के पास दो मुख्य तरह के सरकारी बॉन्ड्स उपलब्ध हैं:

  1. स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDL): ये सीधे राज्य सरकारों द्वारा लिए गए कर्ज होते हैं, जिन्हें RBI मैनेज करता है। इन्हें काफी सुरक्षित माना जाता है और ये फिलहाल 18 साल तक की अवधि के लिए 7.40% से 7.52% तक का यील्ड दे रहे हैं। ये सेंट्रल गवर्नमेंट सिक्योरिटीज की तुलना में 50 से 100 बेसिस पॉइंट ज्यादा यील्ड पर ट्रेड करते हैं।
  2. स्टेट-गारंटीड बॉन्ड्स: ये सीधे राज्य सरकार नहीं, बल्कि राज्य के स्वामित्व वाले संस्थान जारी करते हैं। इन बॉन्ड्स पर राज्य सरकार की गारंटी होती है। ये बॉन्ड्स आजकल निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं क्योंकि ये 8.60% से 9.15% तक का यील्ड दे रहे हैं। ये रिटर्न हाई-ग्रेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज के बीच की जगह पर हैं।

यील्ड और जोखिम का गणित

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की तुलना में, निवेशक अक्सर इश्यूअर की क्रेडिट क्वालिटी देखते हैं। AAA-रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स स्टेट सिक्योरिटीज से थोड़ा ही ऊपर ट्रेड करते हैं, जबकि AA-रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स 8.5% से 10.5% तक यील्ड देते हैं। स्टेट-गारंटीड बॉन्ड्स को कई लोग बीच का रास्ता मान रहे हैं, जो AA-रेटेड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के करीब रिटर्न देते हैं, लेकिन उन पर राज्य सरकार की गारंटी का भरोसा भी होता है।

हालांकि, ज्यादा रिटर्न के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। क्रेडिट रिस्क (पैसे वापस न मिलने का खतरा) भले ही बहुत कम हो, लेकिन ब्याज दरों में बदलाव से बॉन्ड की कीमत पर असर पड़ सकता है, खासकर लंबी अवधि वाले बॉन्ड्स में। लिक्विडिटी (तरलता) भी एक अहम फैक्टर है, क्योंकि सेंट्रल गवर्नमेंट सिक्योरिटीज के मुकाबले स्टेट-स्पेसिफिक पेपर्स का सेकेंडरी मार्केट उतना एक्टिव नहीं होता, जिससे कभी-कभी अपनी होल्डिंग को सही दाम पर बेचना मुश्किल हो सकता है।

इसके अलावा, जारी करने वाले राज्य की वित्तीय सेहत पर नजर रखना भी जरूरी है। एनालिस्ट्स का मानना है कि राज्य के कर्ज का स्तर और रेवेन्यू प्रोफाइल जैसे फैक्टर्स को बॉन्ड यील्ड के साथ देखना चाहिए। निवेशकों को री-इन्वेस्टमेंट रिस्क (भविष्य में कम ब्याज दर पर पैसा दोबारा लगाना पड़ना) और महंगाई का भी ध्यान रखना चाहिए, जो फिक्स्ड इंटरेस्ट पेमेंट्स के रियल वैल्यू को कम कर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.