Religare Enterprises: बड़ा फैसला! इंश्योरेंस और फाइनेंस होंगे अलग, RFL की होगी इंडिपेंडेंट लिस्टिंग

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AuthorMehul Desai|Published at:
Religare Enterprises: बड़ा फैसला! इंश्योरेंस और फाइनेंस होंगे अलग, RFL की होगी इंडिपेंडेंट लिस्टिंग
Overview

Religare Enterprises Limited (REL) ने अपने फाइनेंसियल सर्विसेज (Financial Services) के कारोबार को अलग करने का एक बड़ा फैसला लिया है। कंपनी अपने ब्रोकिंग (Broking) और लेंडिंग (Lending) जैसे कामों को एक नई कंपनी Religare Finvest Limited (RFL) में डीमर्ज (Demerge) करेगी, जिसकी अलग से लिस्टिंग (Listing) कराई जाएगी। वहीं, पैरेंट कंपनी REL के पास अब Care Health Insurance का कारोबार रहेगा।

Religare Enterprises Limited (REL) ने शेयरधारकों (Shareholders) के लिए बड़ा कदम उठाते हुए अपने फाइनेंसियल सर्विसेज (Financial Services) के कारोबार को दो अलग-अलग एंटिटीज (Entities) में बांटने का फैसला किया है। इस स्ट्रैटेजिक डी मर्जर (Strategic Demerger) का मुख्य मकसद कंपनी के अलग-अलग बिज़नेस की वैल्यू को अनलॉक करना और उन्हें भविष्य में बेहतर ग्रोथ देना है।

इस प्लान के तहत, Religare Finvest Limited (RFL) में कंपनी के ब्रोकिंग (Broking), होलसेल लेंडिंग (Wholesale Lending) और हाउसिंग फाइनेंस (Housing Finance) जैसे बिजनेस शामिल होंगे। वहीं, पैरेंट कंपनी REL अब पूरी तरह से Care Health Insurance के तेजी से बढ़ते हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) कारोबार पर ध्यान केंद्रित करेगी। RFL की इंडिपेंडेंट लिस्टिंग (Independent Listing) फाइनेंशियल ईयर 2028 की पहली तिमाही (Q1 FY2028) तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसमें करीब 15 से 18 महीने लग सकते हैं।

बिजनेस का हाल: कहां कितनी ग्रोथ?

Care Health Insurance ने इस दौरान शानदार परफॉरमेंस दिखाई है। रिटेल सेगमेंट (Retail Segment) में 41% की सालाना ग्रोथ (YoY) दर्ज की गई है, और कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹10,000 करोड़ के पार चला गया है। वहीं, कंपनी का सॉल्वेंसी रेश्यो (Solvency Ratio) 1.70 पर बना हुआ है, जो अच्छी कैपिटल हेल्थ को दर्शाता है।

Religare Broking की रेवेन्यू (Revenue) पिछले साल की तुलना में 12% बढ़कर ₹91 करोड़ हो गई है। इसके मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) बुक में 93% की जोरदार उछाल देखी गई, जो अब ₹317 करोड़ पर पहुंच गई है।

Religare Finvest (RFL), जो कंपनी की लेंडिंग आर्म (Lending Arm) है, पर अब लीगेसी इश्यूज (Legacy Issues) को सुलझा लिया गया है। कंपनी के पास ₹480 करोड़ की कैश (Cash) लिक्विडिटी है और इसका नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (Net NPA) रेश्यो 1% पर स्थिर है।

यह डी मर्जर कंपनी के लिए एक नई शुरुआत है, खासकर जब पिछले साल बर्मन फैमिली (Burman Family) ने इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई और बोर्ड में अपनी मौजूदगी मजबूत की। इस कदम का मकसद ऑपरेशंस को स्ट्रीमलाइन करना और ग्रोथ को बूस्ट देना है। पहले भी स्ट्रक्चर को सरल बनाने की कोशिशें हुई थीं, लेकिन यह डी मर्जर एक बड़ा माइलस्टोन साबित हो सकता है।

एनालिस्ट्स के तीखे सवाल और निवेशक की चिंताएं

कंपनी की कॉन्कॉल (Concall) के दौरान एनालिस्ट्स (Analysts) ने कई अहम सवाल पूछे। एक प्रमुख सवाल यह था कि इंश्योरेंस बिजनेस की जगह फाइनेंसियल सर्विसेज को पहले डीमर्ज क्यों किया जा रहा है। मैनेजमेंट ने इसे एक सीक्वेंशियल अप्रोच (Sequential Approach) बताया और कहा कि IRDA (Insurance Regulatory and Development Authority) के साथ प्रमोटर होल्डिंग को लेकर भी बातचीत जारी है।

निवेशकों ने ₹750 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) की रिकवरी पर भी चिंता जताई, जो पूर्व लक्ष्मी विलास बैंक (LVB) के साथ थे। यह मामला अभी कोर्ट में है (Subjudice) और इसके लिए पूरा प्रोविजन (Provision) किया गया है। कंपनी का कहना है कि वे आउट-ऑफ-कोर्ट सेटलमेंट के लिए तैयार हैं, लेकिन पूरी रिकवरी पर जोर दे रहे हैं।

ब्रोकिंग बिजनेस का लो रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) भी चर्चा का विषय रहा, जिसका एक कारण इंडस्ट्री के 21% की तुलना में 14% का लो एक्टिव क्लाइंट रेश्यो (Active Client Ratio) बताया गया। मैनेजमेंट ने कहा कि वे प्रोडक्टिविटी और डिजिटल ग्रोथ पर फोकस कर रहे हैं। साथ ही, इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए 1/n रेगुलेटरी अकाउंटिंग मेथड (Regulatory Accounting Method) को अपनाने से रिपोर्टेड टॉप-लाइन और प्रॉफिट कम दिख सकते हैं, हालांकि अंडरलाइंग रिटेल ग्रोथ मजबूत बनी हुई है।

सामने चुनौतियां और भविष्य की राह

वन-ऑफ कॉस्ट्स (One-off Costs): लेबर कोड (Labour Code) के नए प्रोविजन्स के कारण Q3 FY26 में कंपनी को ₹13.5 करोड़ के वन-ऑफ कॉस्ट्स का सामना करना पड़ा।

लीगल अनसर्टेंटीज (Legal Uncertainties): LVB फिक्स्ड डिपॉजिट रिकवरी और पूर्व चेयरमैन के ESOPs से जुड़े मामले अभी भी कोर्ट में हैं और इनके समाधान की कोई तय समय-सीमा नहीं है।

रेगुलेटरी अकाउंटिंग (Regulatory Accounting): इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए 1/n मेथड में ट्रांजिशन (Transition) रिपोर्टेड प्रॉफिटेबिलिटी को समझने में एक चुनौती पेश करता है, भले ही बिजनेस की मोमेंटम पॉजिटिव हो।

कैपिटल इन्फ्यूजन (Capital Infusion): Care Health को ओरिजिनल इन्वेस्टमेंट प्लान के तहत ₹600 करोड़ तक का कैपिटल इन्फ्यूजन मिल सकता है, जो इसके ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण है।

बिजनेस रीस्टार्ट (Business Restart): RFL हाउसिंग फाइनेंस (Housing Finance) में डिस्बर्समेंट्स (Disbursements) फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, और MSME लेंडिंग (MSME Lending) भी नए लीडरशिप के फाइनल होने के साथ जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

प्रतिस्पर्धी माहौल (Peer Comparison)

हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर में Care Health की 41% की रिटेल ग्रोथ कई प्रतिद्वंद्वियों से आगे है। वहीं, NBFC और ब्रोकिंग स्पेस में RFL की लेंडिंग ऑपरेशंस को फिर से शुरू करने की योजना इसे Bajaj Finance और Home First Finance जैसे मजबूत खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा में लाएगी। ब्रोकिंग सेगमेंट में डिस्काउंट ब्रोकर्स और बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से मुकाबला है, जहां क्लाइंट एंगेजमेंट और टेक्नोलॉजी अहम है।

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