जानिए क्या है Religare Enterprises की नई योजना?
इस योजना के तहत, REL अपनी Care Health Insurance कंपनी को अपने पास रखेगा, जो एक अलग इंश्योरेंस इकाई के तौर पर काम करेगी। वहीं, लेंडिंग (Lending), ब्रोकिंग (Broking) और इन्वेस्टमेंट (Investment) जैसी फाइनेंशियल सर्विसेज का कारोबार उसकी सब्सिडियरी Religare Finvest Ltd. (RFL) में ट्रांसफर किया जाएगा। कंपनी की योजना RFL को Q1 FY28 तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट कराने की है। इसके लिए RFL मौजूदा REL शेयरहोल्डर्स को 1:1 के रेश्यो में शेयर जारी करेगी, यानी डीमर्जर के बाद RFL की शेयरहोल्डिंग पैटर्न REL जैसी ही दिखेगी।
क्यों कर रही है कंपनी यह बड़ा बदलाव?
इस पूरे रीस्ट्रक्चरिंग (Restructuring) का मुख्य उद्देश्य हर बिजनेस सेगमेंट पर फोकस बढ़ाना, ऑपरेशन्स को आसान बनाना और दोनों कंपनियों को स्वतंत्र रूप से बढ़ने के लिए तैयार करना है। मैनेजमेंट का मानना है कि इससे शेयरधारकों को बेहतर वैल्यू मिल सकेगी और दोनों कंपनियां अपने-अपने सेक्टर में तेजी से ग्रोथ कर सकेंगी।
वैल्यूएशन और एग्जीक्यूशन की चुनौतियां
हालांकि, इस डीमर्जर में कई चुनौतियां भी हैं। Religare Enterprises की मार्केट कैप फिलहाल ₹8,122.50 करोड़ है। कंपनी के फाइनेंशियल्स की बात करें तो, इसका P/E रेश्यो (P/E Ratio) काफी वोलेटाइल रहा है, जो कभी निगेटिव तो कभी 135 के आसपास रहा है। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि कंपनी की क्वालिटी 'Not Good' है और वैल्यूएशन 'Somewhat Overvalued' है। इसके अलावा, कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) भी कमजोर रहा है। प्रमोटर होल्डिंग (Promoter Holding) भी केवल ~26.3% है। ऐसे में, इस बड़े रीस्ट्रक्चरिंग को पूरा करने में एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) काफी ज्यादा है, जिसमें NCLT से मंजूरी मिलने में देरी या बदलाव भी शामिल हैं।
अतीत की परेशानियां और रिस्क फैक्टर
इससे पहले 2017 में भी कंपनी पर मैनेजमेंट और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के साथ गलत व्यवहार के आरोप लगे थे, जिसके बाद NCLT में केस भी चला था। हेज फंड्स (Hedge Funds) के नजरिए से, इस डीमर्जर में कई रिस्क हैं, जैसे कि NCLT की मंजूरी, रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) और शेयरधारकों की सहमति। साथ ही, भारत का फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर भी लगातार बदलते रेगुलेटरी नियमों के अधीन है, जो कंपनी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
भविष्य की राह
इन सब चुनौतियों के बावजूद, कंपनी के CFO (Chief Financial Officer) प्रर्तुल गुप्ता (Pratul Gupta) का कहना है कि डीमर्जर से निवेशकों का दायरा बढ़ेगा, कंपनी की संरचना सरल होगी और दोनों नई कंपनियां ग्रोथ के लिए बेहतर स्थिति में होंगी। खास बात यह है कि भारतीय इंश्योरेंस सेक्टर में अगले कुछ सालों में 6.9% सालाना की ग्रोथ का अनुमान है, जो Care Health Insurance के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, इस डीमर्जर की कामयाबी काफी हद तक इसके प्रभावी एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगी।