Reliance Infrastructure की सब्सिडियरी मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) ने ₹2,771.32 करोड़ के भारी कर्ज को रीस्ट्रक्चर करने के लिए नेशनल एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) के साथ एक बड़ा एग्रीमेंट साइन किया है। इस डील से कंपनी दिवालिया होने के खतरे से बच गई है और लंबी अवधि की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी का रास्ता साफ हुआ है।
₹2,771 करोड़ का कर्ज़ रीस्ट्रक्चर
मुंबई मेट्रो की वर्सोवा-अंधेरी-घाटकोपर लाइन चलाने वाली मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (MMOPL) ने ₹2,771.32 करोड़ के कर्ज को चुकाने के लिए एक बड़ी डील फाइनल की है। कंपनी ने 9 जुलाई, 2026 को नेशनल एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) के साथ एक मास्टर रीस्ट्रक्चरिंग एग्रीमेंट (MRA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कदम से MMOPL पर चल रही इनसॉल्वेंसी (दिवालियापन) की कार्यवाही का खतरा टल गया है।
मालिकाना हक़ और गवर्नेंस पर असर
MMOPL, Reliance Infrastructure और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) का जॉइंट वेंचर (JV) है। इसमें Reliance Infrastructure की 74% हिस्सेदारी है, जबकि MMRDA के पास 26% शेयर हैं। इस नए समझौते के तहत, कर्जदाता (NARCL) को कंपनी के गवर्नेंस में दखल देने का अधिकार मिलेगा। NARCL अब MMOPL बोर्ड में एक डायरेक्टर नियुक्त कर सकेगा। इसके अलावा, एक मॉनिटरिंग कमेटी भी बनेगी, जिसमें कंपनी और लेंडर दोनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, ताकि रीस्ट्रक्चरिंग प्लान का सही से पालन हो सके।
Reliance Infrastructure के लिए क्यों है ये बड़ी खबर?
यह डेट रीस्ट्रक्चरिंग Reliance Infrastructure के लिए बहुत मायने रखती है, क्योंकि MMOPL उनकी एक बड़ी सब्सिडियरी है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी कैपिटल खर्च और लंबे समय के लोन की ज़रूरत होती है। इस लोन को NARCL, जिसे भारत का 'बैड बैंक' भी कहा जाता है, को ट्रांसफर करके कंपनी अपनी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाना चाहती है। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि मुंबई मेट्रो लाइन-1 का संचालन बिना किसी रुकावट के जारी रहे।
NARCL की भूमिका?
NARCL को बैंकों के फंसे हुए कर्ज़ (NPA) को सुलझाने के लिए बनाया गया है। जब कोई कंपनी NARCL के साथ डील करती है, तो इसका मतलब है कि लोन की शर्तों में बदलाव किया जाएगा और पेमेंट का तरीका बदला जाएगा। यह दिखाता है कि प्रोजेक्ट वित्तीय दबाव में था, लेकिन अब एक समाधान फ्रेमवर्क तैयार है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को Reliance Infrastructure की ओर से रीपेमेंट प्लान की नई शर्तों पर नज़र रखनी चाहिए। इसके अलावा, कंपनी की दूसरी सब्सिडियरीज़ के डेट मैनेजमेंट, मुंबई मेट्रो लाइन-1 के ऑपरेशनल परफॉरमेंस और NARCL द्वारा नए बोर्ड मेंबर की नियुक्ति जैसे अपडेट्स पर भी ध्यान देना ज़रूरी होगा। ये फैक्टर्स आने वाली तिमाहियों में कंपनी के फाइनेंशियल बोझ को कम करने की क्षमता का आकलन करने में मदद करेंगे।
