Reliance Infrastructure पर ₹187 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का केस, ED ने दर्ज की शिकायत

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Reliance Infrastructure पर ₹187 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का केस, ED ने दर्ज की शिकायत

Reliance Infrastructure Limited (RIL) के लिए मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। डायरेक्टरेट ऑफ एन्फोर्समेंट (ED) ने कंपनी पर साल 2010 में NHAI के 4 टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से ₹187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए एक औपचारिक शिकायत दर्ज की है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह पैसा शेल कंपनियों के ज़रिए, फेक इनवॉइस का इस्तेमाल करके निकाला गया। ED ने कंपनी की कुछ प्रॉपर्टी और Reliance Power के शेयर्स को भी अटैच कर लिया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

क्या है पूरा मामला?

डायरेक्टरेट ऑफ एन्फोर्समेंट (ED) ने Reliance Infrastructure Limited (RIL) और कंपनी के एक अधिकारी सतीश सेठ के खिलाफ एक औपचारिक लीगल कंप्लेंट फाइल की है। यह एक्शन 8 अगस्त, 2026 को लिया गया, जो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा दिए गए चार टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से कथित तौर पर फंड की हेराफेरी की लंबी जांच के बाद आया है।

कैसे हुई ₹187 करोड़ की हेराफेरी?

यह मामला सितंबर और अक्टूबर 2010 के बीच की घटनाओं से जुड़ा है। इसमें திருச்சி-करूर, திருச்சி-डिंडीगुल, सलेम-उलुंदुरपेट और जयपुर-रिंगस जैसे हाईवे प्रोजेक्ट शामिल हैं। अथॉरिटीज का आरोप है कि इन प्रोजेक्ट्स से करीब ₹187 करोड़ की रकम निकाली गई। जांचकर्ताओं का दावा है कि यह पैसा शेल कंपनियों (ऐसी कंपनियां जो सिर्फ कागजों पर मौजूद होती हैं) के ज़रिए, फेक सब-कॉन्ट्रैक्टिंग डील्स और डायमंड इम्पोर्ट के ओवर-वैल्यूड इनवॉइस का इस्तेमाल करके निकाला गया, ताकि पैसों की असली मंज़िल को छुपाया जा सके।

कंपनी की प्रॉपर्टी और शेयर्स पर असर

यह लीगल डेवलपमेंट 3 अगस्त, 2026 को ED द्वारा की गई एक बड़ी कार्रवाई के बाद आया है, जब एजेंसी ने एहतियातन ₹187 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली थी। अटैच की गई प्रॉपर्टी में एक संबंधित एंटिटी की ज़मीन और Reliance Infrastructure द्वारा हेल्ड Reliance Power Limited के बड़ी संख्या में इक्विटी शेयर्स शामिल हैं। निवेशकों के लिए, इक्विटी शेयर्स और प्रॉपर्टी का अटैचमेंट एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह कंपनी की संपत्ति को बांध देता है और उसके फाइनेंशियल प्लानिंग को जटिल बना सकता है।

जांच में शामिल एक अहम व्यक्ति, सतीश सेठ, को जून 2026 में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल ज्यूडिशियल कस्टडी में है। यह कानूनी लड़ाई 2026 के दौरान कंपनी द्वारा सामना की जा रही रेगुलेटरी और लीगल चुनौतियों की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें इकोनॉमिक ऑफेंसेस विंग (EOW) द्वारा जांचें भी शामिल हैं।

निवेशक इन डेवलपमेंट पर क्यों नज़र रखते हैं?

इस तरह की कानूनी और रेगुलेटरी चुनौतियां कंपनी के मैनेजमेंट फोकस और भविष्य की ऑपरेशनल स्टेबिलिटी को लेकर अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं। भले ही कंपनी अपना बिजनेस एक्टिविटीज जारी रखे हुए है, लेकिन संपत्ति के फ्रीज़ या अटैचमेंट से उसकी फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी सीमित हो सकती है। इसके अलावा, लगातार लीगल स्क्रूटनी के कारण स्टॉक प्राइस में अक्सर ज़्यादा वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) देखने को मिलती है, क्योंकि मार्केट कोर्ट या रेगुलेटर से हर नई अपडेट पर रिएक्ट करता है।

निवेशक शायद कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर नज़र रखेंगे, खासकर कि कंपनी फॉर्मल प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट पर कैसी प्रतिक्रिया देती है और क्या अटैच की गई संपत्ति को लेकर कोई और अपडेट आता है। इस मनी लॉन्ड्रिंग केस का अंतिम नतीजा ज्यूडिशियल प्रोसेस से तय होगा, जिसमें समय लग सकता है। मैनेजमेंट की यह क्षमता कि वह मुख्य बिज़नेस ऑपरेशन्स को प्रभावित किए बिना इन लीगल मुश्किलों से कैसे निपटती है, यह हितधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.