Reliance Industries फंड जुटाने के लिए **₹10,000 करोड़** के 10-वर्षीय बॉन्ड लाने की तैयारी में है, जिस पर ब्याज दर **7.90%** तय की गई है। कंपनी विदेशी कर्ज के बजाय घरेलू बाजार से पैसा जुटाने पर जोर दे रही है।
घरेलू कर्ज पर क्यों है फोकस?
Reliance Industries अपनी विस्तार योजनाओं को गति देने के लिए सक्रिय रूप से पूंजी जुटा रही है। हाल ही में कंपनी ने ₹12,000 करोड़ के 5-वर्षीय बॉन्ड 7.47% की दर पर जुटाए थे। इस बार कंपनी 10-वर्षीय बॉन्ड के जरिए ₹10,000 करोड़ का लक्ष्य लेकर चल रही है।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने अमेरिकी डॉलर में कर्ज लेने के बजाय भारतीय बाजार को चुना है। इसका मुख्य कारण अमेरिका में ब्याज दरों का बढ़ना है, जिससे विदेशी मुद्रा में कर्ज लेना महंगा साबित हो रहा है। स्थानीय बाजार से पैसा जुटाकर रिलायंस अपनी विदेशी मुद्रा जोखिम और अतिरिक्त लागत को कम कर रही है।
RBI की पॉलिसी से पहले की तैयारी
इस कदम को काफी रणनीतिक माना जा रहा है। कंपनी 7 अक्टूबर को होने वाली Reserve Bank of India की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले फंड जुटाने की प्रक्रिया पूरी करना चाहती है। इसका मकसद RBI के फैसले के बाद बाजार में होने वाली किसी भी संभावित उतार-चढ़ाव से बचना है।
कर्ज का गणित और ग्रोथ की रणनीति
इस नए दौर की फंडिंग के बाद कंपनी का कुल बकाया बॉन्ड कर्ज बढ़कर लगभग ₹54,000 करोड़ हो जाएगा। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि रिलायंस इस राशि का उपयोग रिटेल, ग्रीन एनर्जी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए कर रही है। हालांकि, यह भारी निवेश कंपनी के कुल इंटरेस्ट खर्च को बढ़ाएगा, जिसे आने वाली तिमाही में कंपनी के कैश फ्लो और प्रॉफिटेबिलिटी के जरिए मैनेज करना एक बड़ी चुनौती होगी।
