Reliance Industries: ₹10,000 करोड़ का बड़ा फंड जुटाने की तैयारी, एसेट-बैक्ड बॉन्ड्स ला रही कंपनी

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AuthorMehul Desai|Published at:
Reliance Industries: ₹10,000 करोड़ का बड़ा फंड जुटाने की तैयारी, एसेट-बैक्ड बॉन्ड्स ला रही कंपनी

Reliance Industries अब कर्ज के बाजार से **₹10,000 करोड़** जुटाने की योजना बना रही है। कंपनी एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के जरिए फंड जुटाएगी, जिसके लिए **8.35% से 8.40%** के कूपन की उम्मीद है।

Reliance Industries एक बार फिर डेट मार्केट (Debt Market) का रुख कर रही है। इस बार कंपनी एसेट-बैक्ड सिक्योरिटीज के माध्यम से ₹10,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। इस डील की खास बात यह है कि यह Reliance Jio Infocomm जैसी सहायक कंपनियों से मिलने वाले रेंटल रेवेन्यू (Rental Receivables) से सुरक्षित (Back) होगी। इस बड़े ट्रांजैक्शन के लिए Barclays मुख्य अरेंजर की भूमिका निभा रहा है और इस 5 साल के इश्यू पर कूपन दर 8.35% से 8.40% रहने का अनुमान है।\n\n### फंड जुटाने की रणनीति\n\nकंपनी अपने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विस्तार के लिए लगातार पूंजी की जरूरत को पूरा करने में जुटी है। इस तरह के बॉन्ड्स, जो सीधे एसेट से मिलने वाली कमाई से जुड़े होते हैं, संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) के लिए अधिक भरोसेमंद माने जाते हैं। यह कदम कंपनी की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपनी बैलेंस शीट को मजबूत रखते हुए ग्रोथ के लिए फंड जुटा रही है।\n\n### निवेशकों के लिए संकेत\n\nReliance Industries का यह कदम सितंबर 2025 में आए ₹21,000 करोड़ के बॉन्ड इश्यू के बाद आया है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि कंपनी के बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पूंजी का खर्च (Capex) जारी है। हालांकि कंपनी की बैलेंस शीट काफी मजबूत है, लेकिन लगातार बढ़ रहे कर्ज और ब्याज के बोझ का मुनाफे पर असर देखना महत्वपूर्ण होगा।\n\n### भारत में बदलता सिक्योरिटाइजेशन मार्केट\n\nभारत का सिक्योरिटाइजेशन मार्केट तेजी से बदल रहा है। मार्च 2026 तक यह मार्केट रिकॉर्ड 1.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पहले इस मार्केट में केवल NBFCs का दबदबा था, लेकिन अब Reliance जैसे दिग्गज समूहों के आने से इसके मायने बदल रहे हैं। यह कंपनी को अपनी लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद करता है।\n\n### आगे क्या देखना होगा?\n\nनिवेशकों को इस डील की अंतिम प्राइसिंग पर नजर रखनी चाहिए। क्या यह कर्ज कंपनी की कुल लायबिलिटी में इजाफा करेगा या फिर इससे जुड़ी परियोजनाओं से होने वाली कमाई इस ब्याज लागत को मात दे पाएगी? यह आने वाले समय में कंपनी के स्टॉक पर असर डालने वाला एक बड़ा फैक्टर होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.