भारतीय शेयर बाज़ारों ने शुक्रवार को शानदार तेजी दिखाई। BSE Sensex में करीब **800** अंकों का उछाल आया, वहीं Nifty भी **24,300** के स्तर के करीब पहुंच गया। Reliance Industries की पहली तिमाही की कमाई के नतीजों से पहले निवेशकों का सेंटिमेंट मजबूत बना रहा। बैंकिंग और IT शेयरों ने इस तेजी में मुख्य भूमिका निभाई, भले ही हालिया सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रही।
Reliance Industries की अगुवाई में बाज़ार में रौनक
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को भारतीय इक्विटी बाज़ारों ने मजबूत वापसी की। वैश्विक बाज़ारों से मिले मिले-जुले संकेतों के बावजूद, बाज़ार में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। BSE Sensex लगभग 800 अंकों की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि Nifty इंडेक्स 24,300 के अहम स्तर की ओर बढ़ चला।
इस शानदार रिकवरी की मुख्य वजह लार्ज-कैप बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सेक्टर के शेयरों में आई ज़बरदस्त तेज़ी रही। निवेशक बड़ी कॉर्पोरेट नतीजों से पहले बाज़ार में अपनी पोजीशन बना रहे थे। Reliance Industries Limited (RIL) इस सत्र का एक बड़ा फोकस रहा, जिसके शेयर की कीमत दिन भर में 2% से ज़्यादा बढ़ी। निवेशक कंपनी के पहली तिमाही के नतीजों का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। Axis Bank, Infosys और Tech Mahindra जैसी अन्य बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई, जिसने बेंचमार्क इंडेक्स को सहारा दिया। Nifty प्राइवेट बैंक इंडेक्स 1.3% और Nifty IT इंडेक्स 1.1% चढ़ा, हालाँकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स पर हल्का दबाव देखा गया।
बाज़ार की चाल और करेंसी पर दबाव
इंडेक्स में ज़बरदस्त उछाल के बावजूद, India VIX, जो बाज़ार की अस्थिरता का अनुमान लगाता है, 3% से ज़्यादा बढ़कर 13.29 पर पहुँच गया। यह वृद्धि दर्शाती है कि इंडेक्स भले ही ऊपर जा रहे हों, लेकिन निवेशक संभावित अस्थिरता को लेकर सतर्क हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते भारतीय रुपया (Indian Rupee) हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। इस करेंसी की कमजोरी के चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हालिया बिकवाली को बल मिला है, जिन्होंने पिछले सत्र में ₹4,200 करोड़ से ज़्यादा के शेयर बेचे थे।
सेक्टर-वार प्रदर्शन और जोखिम
सेक्टरों के प्रदर्शन में भिन्नता देखने को मिली। जहाँ बैंकिंग और टेक्नोलॉजी शेयरों में ज़बरदस्त खरीदारी हुई, वहीं फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में गिरावट आई, इन सेक्टरों के इंडेक्स 1% से ज़्यादा गिरे। इसके अलावा, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और कच्चे तेल की कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) का भाव लगभग $85 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जो चिंताजनक है क्योंकि बढ़ती ऊर्जा लागत महंगाई को बढ़ा सकती है, जिससे कंपनियों के मुनाफे और देश की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है।
निवेशक अब आने वाले नतीजों पर नज़र गड़ाए हुए हैं। प्राइवेट सेक्टर के बैंकों का प्रदर्शन और RIL के नतीजों का नतीजा आने वाले हफ्ते के लिए बाज़ार की दिशा तय कर सकता है। बाज़ार की अगली चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां बढ़ती कमोडिटी लागत के बीच अपने मार्जिन को कैसे बनाए रखती हैं और विदेशी फंड का प्रवाह स्थिर होता है या नहीं।
