Reliance Home Finance: दिवालियापन की राह पर RHFL, क्रेडिटर मीटिंग में अहम फैसले का इंतज़ार

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Reliance Home Finance: दिवालियापन की राह पर RHFL, क्रेडिटर मीटिंग में अहम फैसले का इंतज़ार
Overview

Reliance Home Finance Limited (RHFL) ने 18 फरवरी 2026 को अपनी छठी क्रेडिटर कमेटी (CoC) की मीटिंग आयोजित की। यह मीटिंग कंपनी के इंसॉल्वेंसी (Insolvency) यानी दिवालियापन की प्रक्रिया के तहत एक बड़ा कदम है, जहाँ कंपनी के भविष्य को लेकर चर्चा हुई।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

Reliance Home Finance Limited (RHFL), जो भारी वित्तीय संकट से जूझ रही है, ने 18 फरवरी 2026 को अपनी छठी क्रेडिटर कमेटी (CoC) की मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की। यह मीटिंग कंपनी की कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत एक अहम प्रक्रिया है, जो इस संकटग्रस्त हाउसिंग फाइनेंस फर्म के लिए समाधान खोजने के प्रयासों को दर्शाती है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने 16 सितंबर, 2025 को RHFL को CIRP में स्वीकार किया था, जब कंपनी ₹7.81 करोड़ का डिफॉल्ट करने में नाकाम रही थी। हालांकि, कंपनी की वित्तीय मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं, बल्कि रिपोर्ट्स बताती हैं कि 33 बैंकों और लेंडर्स से लगभग ₹7,523.46 करोड़ का डिफॉल्ट बकाया है, जो इसके भारी कर्ज संकट को उजागर करता है।

इंसॉल्वेंसी का सफर और CoC की भूमिका

RHFL की वर्तमान स्थिति का मुख्य आधार यह है कि यह CIRP के तहत एक 'कॉर्पोरेट देनदार' (Corporate Debtor) है। इसका मतलब है कि कंपनी के कामकाज पर रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल, श्री उमेश बलराम सोनकर, की देखरेख है और इसका भविष्य क्रेडिटर कमेटी (CoC) के हाथों में है। वित्तीय क्रेडिटर्स से बनी यह CoC इंसॉल्वेंसी प्रक्रिया में अंतिम निर्णय लेने वाली संस्था है। यह संभावित रेज़ोल्यूशन प्लान्स का मूल्यांकन करती है, और इसका 'कमर्शियल विजडम' (commercial wisdom) तय करता है कि कंपनी को बचाया जाएगा या लिक्विडेट (liquidate) किया जाएगा। 18 फरवरी, 2026 जैसी नियमित मीटिंग्स इस जटिल प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं, जिसका लक्ष्य कंपनी की संपत्तियों का मूल्य बढ़ाना और कर्ज वसूली के लिए एक ढाँचा तैयार करना है। इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) CoC को रेज़ोल्यूशन प्लान को मंज़ूरी या अस्वीकार करने का अधिकार देता है, जिससे उनके फैसले सर्वोपरि हो जाते हैं।

अनियमितताओं का लंबा इतिहास

RHFL का इंसॉल्वेंसी की ओर सफर कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि यह सालों के कथित वित्तीय कुप्रबंधन और रेगुलेटरी नियमों के उल्लंघन का परिणाम है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की जाँचों में गंभीर अनियमितताएँ सामने आई थीं, खासकर फाइनेंशियल ईयर 2017-18 और 2018-19 के बीच कॉर्पोरेट लोन के वितरण में। SEBI की जाँच में पाया गया कि लोन की मंजूरी और वितरण इतनी तेजी से होता था, कि आवेदन के उसी दिन लोन पास कर दिया जाता था, और उचित ड्यू डिलिजेंस (due diligence) नहीं किया जाता था। आरोप है कि इन लोन्स का एक बड़ा हिस्सा Reliance Anil Dhirubhai Ambani Group (ADAG) से जुड़ी संस्थाओं को दिया गया था, जो फंड डायवर्जन (fund diversion) की ओर इशारा करता है। RHFL के ऑडिटर, PwC, ने भी जून 2019 में पारदर्शिता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अपना ऑडिट एंगेजमेंट वापस ले लिया था, जो एक बड़ा रेड फ्लैग (red flag) था। इन खुलासों के बाद, SEBI ने RHFL और अनिल अंबानी सहित संबंधित व्यक्तियों पर सिक्योरिटीज कानूनों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाया, जो कॉर्पोरेट गवर्नेंस में गंभीर खामियों को दर्शाता है।

शेयरधारकों के लिए जोखिम और भविष्य की अनिश्चितता

सभी हितधारकों, खासकर शेयरधारकों के लिए मुख्य जोखिम रेज़ोल्यूशन प्लान से जुड़ी अनिश्चितता है। इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि कोई व्यवहार्य (viable) प्लान मंज़ूर होगा, जिससे RHFL का लिक्विडेशन हो सकता है और निवेशकों को न्यूनतम रिकवरी मिल सकती है। कंपनी का फंड डायवर्जन और गंभीर वित्तीय संकट का पिछला इतिहास यह बताता है कि किसी भी संभावित खरीदार को इस बिज़नेस को दोबारा पटरी पर लाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। निवेशकों को आने वाले महीनों में रेज़ोल्यूशन प्लान जमा करने की डेडलाइन और CoC की चर्चाओं पर अपडेट्स पर नज़र रखनी चाहिए। सितंबर 2025 में शुरू हुई यह प्रक्रिया जटिल और लंबी हो सकती है।

सेक्टर के मुकाबले RHFL की हालत

जबकि Bajaj Finance और HDFC Ltd जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की मदद से व्यापक भारतीय नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर में मजबूती और विकास देखा गया है, RHFL बिल्कुल अलग स्थिति में है। ये प्रमुख कंपनियाँ मजबूत कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (capital adequacy ratio), अच्छी एसेट क्वालिटी (asset quality) और स्पष्ट ग्रोथ स्ट्रेटेजी (growth strategy) बनाए रखती हैं, जिन्हें लगातार मुनाफे और निवेशकों के विश्वास का समर्थन प्राप्त है। RHFL की स्थिति, हालांकि, अत्यधिक वित्तीय संकट, दिवालियापन की कार्यवाही और पिछले रेगुलेटरी एक्शन से ग्रस्त है, जिससे यह सेक्टर में एक आउटलायर (outlier) बन गई है। इसका आगे का रास्ता IBC द्वारा तय किया जा रहा है, जो इसके स्वस्थ साथियों की ऑपरेशनल और ग्रोथ-केंद्रित रणनीतियों से बिलकुल अलग है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.