Reliance Home Finance Limited (RHFL) ने अपने सातवीं कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की बैठक की औपचारिक घोषणा कर दी है। यह बैठक 9 मार्च 2026 को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए आयोजित की जाएगी। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब कंपनी कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के दायरे में है।
CoC की भूमिका और महत्व
यह समझना ज़रूरी है कि कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) भारत के इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत किसी संकटग्रस्त कंपनी की समाधान प्रक्रिया में सबसे बड़ा निर्णय लेने वाला निकाय है। इसके सदस्य, जो वित्तीय लेनदारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, कंपनी के भविष्य को तय करने की शक्ति रखते हैं – चाहे उसे फिर से शुरू किया जाए या लिक्विडेट (Liquidate) किया जाए। CIRP को आगे बढ़ाने और जटिल वित्तीय चुनौतियों से निपटने के लिए नियमित बैठकें महत्वपूर्ण हैं।
कंपनी की पृष्ठभूमि
Reliance Home Finance Limited (RHFL), Reliance Capital की एक एसोसिएट कंपनी और अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) का हिस्सा, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) द्वारा 16 सितंबर 2025 को स्वीकार किए जाने के बाद कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में प्रवेश कर गई थी। कंपनी ने पहले भी गंभीर वित्तीय संकट का सामना किया है, जिसमें लिक्विडिटी की कमी और अपने ऋण दायित्वों पर डिफॉल्ट शामिल हैं, जिसके कारण इसके क्रेडिट रेटिंग को 'D' तक गिरा दिया गया था। CIRP से पहले, RHFL को कथित फंड डायवर्जन और अनियमित ऋण वितरण के लिए SEBI की जांच का सामना करना पड़ा था, और इसके ऑडिटर PwC ने भी ईमानदारी संबंधी चिंताओं के कारण अपनी सेवाएं वापस ले ली थीं।
आगे की राह और संभावित बदलाव
शेयरधारकों और अन्य हितधारकों को समाधान योजना पर चल रही चर्चाओं की प्रगति पर अपडेट मिलने की उम्मीद है। CoC की बैठकों में नए प्रस्तावों का मूल्यांकन या मौजूदा प्रस्तावों के लिए समय-सीमा का विस्तार शामिल हो सकता है। लिए गए निर्णय लेनदारों की रिकवरी की संभावनाओं और किसी भी शेष इक्विटी मूल्य को प्रभावित कर सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया रेज़ोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional) और NCLT की निगरानी में जारी है।
संभावित जोखिम
मुख्य जोखिम CIRP से जुड़ी अनिश्चितता और लंबी समय-सीमा की संभावना बनी हुई है। ऐसी संभावना है कि कोई व्यवहार्य समाधान योजना स्वीकृत न हो, जिससे कंपनी का लिक्विडेशन (Liquidation) हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप हितधारकों को बहुत कम रिकवरी मिल सकती है। पिछली वित्तीय अनियमितताएं और गवर्नेंस के मुद्दे समाधान प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं और संभावित निवेशकों को हतोत्साहित कर सकते हैं।
तुलनात्मक परिदृश्य
बड़े नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज़ (NBFCs) जैसे Bajaj Finance और HDFC Ltd मजबूत वित्तीय स्वास्थ्य, बेहतर एसेट क्वालिटी और स्पष्ट ग्रोथ स्ट्रेटेजी के साथ काम करती हैं। इसकी तुलना में, RHFL गंभीर वित्तीय संकट और दिवालियापन की कार्यवाही से गुजर रही है, जिससे सीधी तुलना करना मुश्किल है।
प्रमुख आंकड़े और समय-सीमा
RHFL के लिए कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) 16 सितंबर 2025 को शुरू हुआ था। कंपनी पर 33 लेनदारों से कुल ₹7,523.46 करोड़ के दावों का बोझ है। इससे पहले CoC की बैठकें 15 अक्टूबर 2025 (पहली), 1 दिसंबर 2025 (तीसरी) और 18 फरवरी 2026 (छठी) को आयोजित की गई थीं।
आगे क्या देखना है
9 मार्च की बैठक के दौरान कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स द्वारा लिए गए कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय या स्वीकृतियां। समाधान योजनाओं की प्रस्तुति या मूल्यांकन पर अपडेट। CIRP में संभावित समय-सीमा विस्तार या मौजूदा शेड्यूल का पालन। समाधान प्रगति के संबंध में RHFL द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों को आगे कोई भी जानकारी। CIRP का अंतिम परिणाम, चाहे वह समाधान योजना की मंजूरी हो या लिक्विडेशन।
