रेगुलेटर्स का बड़ा कदम: स्टेेबलकॉइन के लिए स्पष्टता की ओर
अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था में स्टेेबलकॉइन को मुख्यधारा में लाने की कवायद तेज हो गई है। ऑफिस ऑफ द कंट्रोलर ऑफ द करेंसी (OCC) ने GENIUS Act के तहत एक प्रस्तावित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पेश किया है, जो July 2025 में कानून बना था [4, 10]। इस प्रस्ताव में अमेरिकी स्टेेबलकॉइन जारीकर्ताओं के लिए कड़े मानक तय किए गए हैं, जिनमें रिजर्व की जरूरतें भी शामिल हैं। इसके तहत उन्हें कम से कम 1:1 के अनुपात में पहचान योग्य, अत्यधिक लिक्विड एसेट्स जैसे अमेरिकी डॉलर, फेड अकाउंट बैलेंस और शॉर्ट-टर्म ट्रेजरी बिलों से बैकिंग करनी होगी [10, 13, 23]। यह फ्रेमवर्क एसेट कस्टडी, ग्राहकों के रिडेम्पशन (Redemption) और बिजनेस रजिस्ट्रेशन जैसे मुद्दों को भी संबोधित करता है, ताकि स्टेेबलकॉइन इंडस्ट्री "सुरक्षित और सुदृढ़ तरीके से" फल-फूल सके [4]।
इस बीच, फेडरल रिजर्व भी स्टेेबलकॉइन जारीकर्ताओं के लिए कैपिटल और लिक्विडिटी के नियमों पर काम कर रहा है, ताकि बैंकिंग सिस्टम डिजिटल एसेट एक्टिविटीज को सपोर्ट करने के लिए स्पष्टता पा सके [2]। यह रेगुलेटरी तेजी अमेरिका को डिजिटल फाइनेंशियल मार्केट्स में एक लीडर के तौर पर स्थापित करने की कोशिश को दर्शाती है, जो पहले इन मामलों में काफी सतर्क रवैया अपनाता था [2, 6]।