क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का लोन बुक ₹5.78 लाख करोड़ पार, PSL लक्ष्य से आगे

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का लोन बुक ₹5.78 लाख करोड़ पार, PSL लक्ष्य से आगे

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने वित्तीय वर्ष 2026 में अपनी कुल लोन पोर्टफोलियो को **10.3%** बढ़ाकर **₹5.78 लाख करोड़** तक पहुंचा दिया है। यह सेक्टर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के **75%** के प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) लक्ष्य को आसानी से पार करते हुए **91.7%** पर पहुंच गया है। इस विस्तार से ग्रामीण कृषि और छोटे व्यवसायों को मिलने वाले क्रेडिट में बढ़ोतरी हुई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन (financial inclusion) के लक्ष्यों को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

RRBs की शानदार परफॉरमेंस

भारत में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने वित्तीय वर्ष 2026 में दमदार प्रदर्शन किया है। बैंकों की कुल लोन आउटस्टैंडिंग 10.3% बढ़कर ₹5.78 लाख करोड़ हो गई है, जो पिछले साल के ₹5.24 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में क्रेडिट फ्लो में लगातार हो रही बढ़ोतरी को दर्शाता है, जहां ये बैंक वित्तीय समावेशन (financial inclusion) को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाते हैं।

RBI के PSL लक्ष्य को पार

नियामक (regulatory) मोर्चे पर भी RRBs का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग (PSL) नियमों के तहत, जिसके अनुसार बैंकों को अपने एडजस्टेड नेट बैंक क्रेडिट (Adjusted Net Bank Credit) का 75% विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश करना होता है, RRBs ने सामूहिक रूप से 91.7% का लक्ष्य हासिल किया। इससे पता चलता है कि अधिकांश बैंक अपने निर्धारित क्रेडिट लक्ष्यों से काफी आगे हैं।

कृषि और छोटे व्यवसायों पर फोकस

RRB की लोनिंग का मुख्य आधार कृषि क्षेत्र बना हुआ है, जो कुल प्रायोरिटी सेक्टर क्रेडिट का 77% हिस्सा है, यानि ₹3.78 लाख करोड़। इस सहायता का लगभग पूरा हिस्सा फार्म क्रेडिट (farm credit) पर केंद्रित रहा, जिसमें फसल की खेती और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश शामिल है। यह सरकार के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के अनुरूप है, खासकर उन किसानों को संस्थागत ऋण (institutional credit) प्रदान करके जो अन्यथा अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हो सकते हैं।

खेती के अलावा, RRBs ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) सेक्टर में ₹66,978 करोड़ का फंड मुहैया कराया। इस डेटा से एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आती है कि MSME फंडिंग का 95% से अधिक हिस्सा माइक्रो-एंटरप्राइजेज तक पहुंचा। सबसे छोटे व्यावसायिक इकाइयों को प्राथमिकता देकर, RRBs अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पहली पीढ़ी के उद्यमियों (entrepreneurs) और स्थानीय कारीगरों को सक्रिय रूप से समर्थन दे रहे हैं।

सेक्टर की संरचना और वित्तीय स्थिरता

सरकार की 'वन स्टेट, वन RRB' (One State, One RRB) विलय नीति के बाद, देश भर में अब 28 समेकित RRBs (consolidated RRBs) काम कर रहे हैं। हालांकि ये संस्थान वर्तमान में सूचीबद्ध (unlisted) हैं और स्टॉक एक्सचेंजों पर सीधे कारोबार के लिए उपलब्ध नहीं हैं, सरकार ने पहले ही वित्तीय वर्ष 2027 तक लाभदायक RRBs को सूचीबद्ध (list) करने की योजना का संकेत दिया है। बैंकिंग सेक्टर में निवेशकों के लिए, RRBs का प्रदर्शन ग्रामीण मांग (rural demand) और क्रेडिट पहुंच (credit penetration) के स्वास्थ्य का एक संकेतक (proxy) है।

हालांकि, इस क्षेत्र को संरचनात्मक चुनौतियों (structural challenges) का सामना करना पड़ रहा है। एसेट क्वालिटी (Asset quality) एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है, क्योंकि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) इन क्षेत्रीय ऋणदाताओं (regional lenders) की बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकते हैं। इसके अतिरिक्त, क्रेडिट ग्रोथ मजबूत होने के बावजूद, RRBs को परिचालन संबंधी बाधाओं (operational hurdles) का सामना करना पड़ता है, जिसमें डिजिटल बैंकिंग को अपनाने में देरी और दूरदराज की शाखाओं में उन्नत भौतिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता शामिल है। इन बैंकों की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता (financial stability) प्रायोजक बैंकों (sponsor banks) और केंद्र सरकार से निरंतर नीतिगत समर्थन (policy support) और पूंजी निवेश (capital infusion) पर बहुत अधिक निर्भर करती है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र संभावित भविष्य की लिस्टिंग की ओर बढ़ रहा है, निवेशक NPA प्रबंधन के रुझानों और उनकी शाखा नेटवर्क में डिजिटल तकनीक के सफल एकीकरण पर बारीकी से नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.