RBI का UDGAM पोर्टल: सालों से बंद पड़े बैंक खातों का पैसा वापस पाने का आसान तरीका

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का UDGAM पोर्टल: सालों से बंद पड़े बैंक खातों का पैसा वापस पाने का आसान तरीका

क्या आपके भी सालों से बंद पड़े बैंक खातों में पैसे फंसे हैं? घबराइए नहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के UDGAM पोर्टल से आप अपने या अपने प्रियजनों के लावारिस पड़े खातों का पता लगा सकते हैं और जमा की गई राशि वापस पा सकते हैं। जानिए यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है और क्या हैं इसके जोखिम।

क्या है UDGAM पोर्टल?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब आम लोगों के लिए एक ऐसी सुविधा शुरू की है जिससे वे अपने उन बैंक खातों में जमा पैसे वापस पा सकते हैं जो सालों से बंद पड़े हैं। असल में, जब कोई बैंक खाता 10 साल से ज्यादा समय तक इनऑपरेटिव रहता है, तो उसमें जमा राशि को बैंक रेगुलेशन के तहत 'डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड' (DEAF) में ट्रांसफर कर दिया जाता है। ऐसा नहीं है कि आपका पैसा डूब गया, बल्कि यह सरकार के पास जमा हो जाता है। इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए RBI ने UDGAM (Unclaimed Deposits – Gateway to Access inforMation) नाम का एक खास पोर्टल लॉन्च किया है। इसकी मदद से आप एक ही जगह पर कई बैंकों में पड़े अपने लावारिस पैसों का पता लगा सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्यों ज़रूरी है?

अक्सर ऐसा होता है कि परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद या किसी वजह से नौकरी या जगह बदलने पर पुराने बैंक खाते भूल जाते हैं। ऐसे में, उन खातों में जमा राशि परिवार के लिए एक बड़ी संपत्ति हो सकती है। अपनी वेल्थ मैनेजमेंट और एस्टेट प्लानिंग के लिए इस प्रक्रिया को समझना बहुत ज़रूरी है। यह पैसा कानूनी तौर पर आपका ही है, लेकिन इसे वापस पाने में थोड़ा समय लग सकता है। UDGAM पोर्टल आपको यह जानने में मदद करता है कि आपका पैसा कहां जमा है, लेकिन असली क्लेम की प्रक्रिया उसी बैंक में होगी जहां आपका खाता था।

पैसे वापस पाने की प्रक्रिया

UDGAM पोर्टल सिर्फ एक सर्च टूल है, यह सीधे पैसे वापस देने का प्लेटफॉर्म नहीं है। जैसे ही आपको पोर्टल पर अपने लावारिस डिपॉजिट का पता चलता है, आपको क्लेम करने के लिए उस बैंक से संपर्क करना होगा। यह ऑटोमैटिक रिफंड सिस्टम नहीं है; बैंक को आपकी पहचान वेरिफाई करनी होगी। अगर आप खुद खाताधारक हैं, तो आपको अपने KYC डॉक्यूमेंट्स देने होंगे। अगर खाता किसी मृत व्यक्ति का है, तो नॉमिनी या कानूनी वारिस को मृत्यु प्रमाण पत्र, सक्सेशन सर्टिफिकेट या वसीयत जैसे अतिरिक्त दस्तावेज देने होंगे।

क्या हैं जोखिम?

यह सिस्टम सही मालिकों को उनका पैसा वापस दिलाने के लिए ही बनाया गया है, लेकिन कुछ परेशानियां आ सकती हैं। सबसे बड़ा जोखिम डॉक्यूमेंटेशन की जटिलता है। पुराने खातों के लिए बैंक के पास शायद आज के रिकॉर्ड न हों, और वारिसों को यह साबित करने में काफी मुश्किलें आ सकती हैं कि वे असली खाताधारक के रिश्तेदार हैं। इसके अलावा, RBI अक्सर नकली वेबसाइटों या धोखेबाजों से सावधान रहने की चेतावनी देता है जो आपसे पैसे ऐंठकर लावारिस फंड दिलाने का दावा करते हैं। इसलिए, आपको हमेशा RBI के आधिकारिक UDGAM पोर्टल का ही इस्तेमाल करना चाहिए और किसी भी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट को अपने बैंकिंग क्रेडेंशियल, OTP या पासवर्ड कभी नहीं देने चाहिए।

बैंकिंग सेक्टर का संदर्भ

लावारिस जमा राशि भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़ी देनदारी है। बैंक इन पैसों को DEAF स्कीम के तहत मैनेज करते हैं। इस सर्च प्रोसेस को डिजिटल बनाना नियामक की ओर से पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने का एक कदम है। लावारिस जमाओं की बड़ी संख्या यह बताती है कि बैंकों को खाताधारकों के साथ बेहतर तरीके से संपर्क बनाए रखने की ज़रूरत है, खासकर जब ब्रांच नेटवर्क बदलते हैं या खाते मर्ज होते हैं।

निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

अगर आपको लगता है कि आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पास लावारिस फंड हैं, तो पहला कदम आधिकारिक UDGAM पोर्टल पर जाकर इनकी पुष्टि करना है। भविष्य में अपने खातों को डॉर्मेंट होने से बचाने के लिए नियमित रूप से अपने सभी एक्टिव बैंक खातों के KYC स्टेटस पर नज़र रखें। अगर आप किसी विरासत का प्रबंधन कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि सभी वित्तीय रिकॉर्ड एक साथ हों और नॉमिनेशन अपडेटेड हों ताकि बाद में लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से बचा जा सके। RBI के आधिकारिक संचार पर भी नज़र रखें, क्योंकि वे समय-समय पर पोर्टल पर भाग लेने वाले बैंकों की सूची और क्लेम प्रक्रिया को अपडेट करते रहते हैं।

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