सरकार के खजाने को बूस्ट
यह बड़ी रकम सरकार को अपने वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगी और कर्ज लेने या सरकारी संपत्तियां बेचने की जरूरत को कम करेगी।
डिविडेंड का रिकॉर्ड अनुमान
सरकार के बजट अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में RBI और PSBs से कुल ₹3.16 लाख करोड़ का डिविडेंड मिलने की उम्मीद है। यह चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹3.04 लाख करोड़ के रिवाइज्ड अनुमान से काफी ऊपर है। खास बात यह है कि चालू वित्त वर्ष के लिए यह आंकड़ा पहले के बजट अनुमान ₹2.56 लाख करोड़ से ₹44,590 करोड़ ज्यादा है।
RBI का फॉरेक्स गेम
इस भारी-भरकम डिविडेंड में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का बड़ा योगदान है। RBI ने फॉरेन एक्सचेंज (Foreign Exchange) मार्केट में दखल देकर अच्छा मुनाफा कमाया है। जनवरी 2026 तक RBI ने करीब $43.2 बिलियन की विदेशी मुद्रा बेची है। इन ऑपरेशंस को रुपए की अस्थिरता (Volatility) को संभालने के लिए किया गया था, और यह RBI की खरीद लागत से बेहतर एक्सचेंज रेट पर हुआ, जिससे उसे काफी फायदा हुआ। इसी फायदे को RBI सरकार को डिविडेंड के तौर पर दे रहा है।
PSBs की बढ़ती प्रॉफिटेबिलिटी
सरकारी बैंकों (PSBs) का प्रदर्शन भी इस बार शानदार रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए PSBs ने कुल ₹34,995 करोड़ का डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 26% ज्यादा है। बैंकों के नेट प्रॉफिट (Net Profit) में बढ़ोतरी इसका मुख्य कारण है। वित्त वर्ष 2025 के लिए PSBs का कुल नेट प्रॉफिट ₹1.5 लाख करोड़ से ऊपर जाने का अनुमान है। देश के सबसे बड़े बैंक SBI समेत कई बड़े बैंकों ने डिविडेंड में अहम योगदान दिया है।
वैल्यूएशन और परफॉरमेंस
SBI जैसे बड़े सरकारी बैंकों का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹5.5 लाख करोड़ रहा है, और उनका P/E (Price-to-Earnings) रेश्यो 16-18x के आसपास है। हालांकि, प्राइवेट बैंकों की तुलना में इनका वैल्यूएशन अभी भी कम है, लेकिन PSBs का सुधरा हुआ फाइनेंशियल परफॉरमेंस सरकार के लिए डिविडेंड का एक भरोसेमंद जरिया बन गया है।
फिस्कल गोल्स और भविष्य का आउटलुक
सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 तक फिस्कल डेफिसिट को GDP के 5.3% पर लाने का है। ऐसे में RBI और PSBs से मिलने वाला यह रिकॉर्ड डिविडेंड सरकारी खजाने के लिए एक बड़ी राहत है, जिससे महंगे कर्ज या सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की जरूरत कम हो जाएगी। हालांकि, एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि इस डिविडेंड की लगातार आमदनी बाहरी कारकों पर निर्भर करेगी, जैसे ग्लोबल मार्केट की स्थिति, RBI की फॉरेक्स मैनेजमेंट की जरूरतें और PSBs की कमाई की रफ्तार।