Fintech कंपनी Razorpay ने IFSCA से अपना फाइनल Payment Service Provider (PSP) लाइसेंस हासिल कर लिया है। अब कंपनी GIFT City के जरिए कैपिटल-अकाउंट ट्रांजैक्शंस को प्रोसेस कर सकेगी, जिससे भारतीय निवेशकों के लिए ग्लोबल मार्केट्स में निवेश करना और आसान हो जाएगा।
अब ग्लोबल निवेश होगा आसान
अभी तक Razorpay का कामकाज मुख्य रूप से Payment Aggregator-Cross Border (PA-CB) लाइसेंस तक सीमित था, जो केवल ट्रेड से जुड़े लेन-देन (current-account transactions) की इजाजत देता था। नए PSP लाइसेंस के साथ, कंपनी अब कैपिटल-अकाउंट ट्रांजैक्शंस को हैंडल कर पाएगी। यह उन निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर है जो इंटरनेशनल स्टॉक या डेट मार्केट्स में पैसा लगाना चाहते हैं।
इस सुविधा को शुरू करने के लिए Razorpay ने RBL Bank और ICICI Bank के साथ टेक्निकल इंटीग्रेशन पूरा कर लिया है। कंपनी का मकसद इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स के सेटअप टाइम को महीनों से घटाकर हफ्तों में लाना है, जो IFSCA के 2024 के नियमों के अनुसार काम करेगा।
निवेशकों के लिए जरूरी बात
ध्यान रखें कि Razorpay एक प्राइवेट और अनलिस्टेड कंपनी है। यह NSE या BSE पर ट्रेड नहीं होती है। जो लोग इसमें निवेश करना चाहते हैं, वे इसे नॉर्मल ब्रोकरेज अकाउंट से नहीं खरीद सकते। अनलिस्टेड शेयर्स में निवेश जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि इसमें लिक्विडिटी कम होती है और प्राइस की पारदर्शिता भी कम रहती है।
रेगुलेटरी और सिक्योरिटी चुनौतियां
GIFT City में काम करने के लिए कंपनी को FEMA और IFSCA की कड़ी गाइडलाइंस का पालन करना होगा। क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट का बिजनेस रेगुलेटरी बदलावों के प्रति काफी संवेदनशील होता है। साथ ही, साइबर सिक्योरिटी, धोखाधड़ी और फिशिंग जैसे खतरों से निपटने के लिए कंपनी को बेहद सतर्क रहने की जरूरत होगी। कंपनी की सफलता पूरी तरह इस पर निर्भर करेगी कि वह कितनी तेजी से अपनी सर्विस को मार्केट में विस्तार दे पाती है और नियमों का पालन सुनिश्चित कर पाती है।
