Razorpay और EbixCash की GIFT City में बड़ी एंट्री, ग्लोबल एक्सपेंशन के लिए मांगी मंजूरी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Razorpay और EbixCash की GIFT City में बड़ी एंट्री, ग्लोबल एक्सपेंशन के लिए मांगी मंजूरी

फिनटेक दिग्गज Razorpay और EbixCash अब GIFT City के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में अपनी जगह बनाने की तैयारी में हैं। इस कदम का मकसद क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट बिजनेस को रफ्तार देना और रेगुलेटरी नियमों को आसान बनाना है।

भारत के दो दिग्गज फिनटेक प्लेयर Razorpay और EbixCash अब गुजरात के GIFT City स्थित इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में अपना ऑपरेशन जमाने की दिशा में बढ़ रहे हैं। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल पेमेंट्स और देश से बाहर भेजे जाने वाले रेमिटेंस (remittance) को और आसान बनाना है।

क्यों है GIFT City का आकर्षण?

इस शिफ्ट की सबसे बड़ी वजह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर अथॉरिटी (IFSCA) का 'यूनिफाइड रेगुलेटरी स्ट्रक्चर' है। बड़ी फिनटेक कंपनियों को अक्सर बैंकिंग, इंश्योरेंस और कैपिटल मार्केट्स जैसे अलग-अलग सेक्टरों में काम करने के लिए जटिल नियमों का सामना करना पड़ता है। GIFT City में आकर ये कंपनियां एक ही रेगुलेटर के दायरे में काम कर सकेंगी, जिससे कंप्लायंस का बोझ कम होगा और इंटरनेशनल मार्केट में नए प्रोडक्ट तेजी से लॉन्च किए जा सकेंगे।

तैयारियों का जायजा

दोनों कंपनियां इस बदलाव के लिए काफी समय से कमर कस रही हैं:

  • EbixCash: कंपनी को जनवरी 2026 में GIFT IFSC में पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस के लिए इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है। इसके अलावा, जुलाई 2026 में RBI से मिला 'परपेचुअल लाइसेंस' इनके ट्रेड और फैमिली रेमिटेंस बिजनेस को नई ऊंचाई देगा।
  • Razorpay: कंपनी ने 1 जनवरी 2026 को अपना बड़ा इंटरनल रिस्ट्रक्चरिंग पूरा किया है, जिसमें पेमेंट एग्रीगेशन बिजनेस को एक अलग एंटिटी में ट्रांसफर किया गया है। यह कदम उनके भविष्य के IPO रोडमैप का हिस्सा माना जा रहा है।

IPO का गणित और रिस्क फैक्टर

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि यह विस्तार इन कंपनियों के 2026-2027 के दौरान संभावित IPO के लिए बेहद अहम है। भारतीय बाजार से आगे बढ़कर ग्लोबल लेवल पर अपनी पहुंच दिखाना इनके वैल्यूएशन के लिए जरूरी है।

हालांकि, निवेशकों को यह भी समझना होगा कि फिनटेक सेक्टर में प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इन कंपनियों को कड़ी रेगुलेटरी स्क्रूटनी से गुजरना होगा, और अगर IFSCA या RBI के नियमों का पालन करने में कोई देरी हुई, तो इसका असर सीधे ऑपरेशंस पर पड़ेगा। बाजार में इनके शेयर अभी लिस्टेड नहीं हैं, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में वैल्यूएशन काफी हद तक इनके मुनाफे के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.