Rajesh Exports ने Debt Recovery Tribunal के आदेश के बाद Canara Bank का **₹510 करोड़** का बकाया चुका दिया है। हालांकि, कंपनी अभी भी SEBI और Enforcement Directorate (ED) की गंभीर जांच के घेरे में है।
बैंक का बकाया और कानूनी राहत
ज्वेलरी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनी Rajesh Exports ने Debt Recovery Tribunal (DRT) के निर्देश का पालन करते हुए Canara Bank को ₹510 करोड़ का भुगतान कर दिया है। इस भुगतान के साथ ही लेंडर और कंपनी के बीच चल रही एक लंबी कानूनी लड़ाई का फिलहाल समापन हो गया है। लेकिन, यह राहत कंपनी की बड़ी परेशानियों के सामने बहुत छोटी दिख रही है।
SEBI और ED की रडार पर कंपनी
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती रेगुलेटरी जांच है। जून 2026 में, SEBI ने एक अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें कंपनी की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। नियामक का दावा है कि कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2021 से 2025 के बीच अपने कंसोलिडेटेड रेवेन्यू को ₹15.15 लाख करोड़ तक गलत तरीके से पेश किया हो सकता है।
इसके साथ ही, Enforcement Directorate (ED) भी कंपनी की जांच कर रही है। मामला लगभग ₹3,000 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन से जुड़ा है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या ओवरसीज ट्रेड के दस्तावेजों में हेराफेरी हुई है या विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन किया गया है। इस जांच में कंपनी की सब्सिडियरी Valcambi SA की भूमिका भी काफी अहम मानी जा रही है।
शेयर बाजार पर भारी दबाव
इन विवादों के कारण निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा गया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर जो कभी ₹238 के 52-वीक हाई पर था, अब लुढ़क कर लगभग ₹76 पर ट्रेड कर रहा है। निवेशकों के लिए कंपनी की तरफ से इन आरोपों पर दी जाने वाली स्पष्टीकरण और सरकारी जांच का अंतिम नतीजा सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहने वाला है।
