Radhagobind Commercial पर Insolvency का साया, अब Forensic Audit की भेंट चढ़ी कंपनी!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Radhagobind Commercial पर Insolvency का साया, अब Forensic Audit की भेंट चढ़ी कंपनी!
Overview

Radhagobind Commercial Limited के निवेशकों के लिए बुरी खबर है। कंपनी, जो पहले से ही इनसॉल्वेंसी (Insolvency) की प्रक्रिया से गुजर रही है, अब फोरेंसिक ऑडिट (Forensic Audit) की जद में आ गई है। 14 फरवरी, 2026 को होने वाली कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (COC) की मीटिंग में इस ऑडिट की नियुक्ति पर चर्चा होगी, जो कंपनी के पिछले वित्तीय सौदों की गहराई से जांच का संकेत है।

Insolvency प्रक्रिया के बीच Forensic Audit का ऐलान

NCLT कोलकाता ने 30 अक्टूबर, 2025 को Radhagobind Commercial Limited के खिलाफ दिवालियापन (insolvency) याचिका स्वीकार की थी, जिसके बाद कंपनी Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) के तहत आ गई। यह कदम ₹1.03 करोड़ के लोन डिफॉल्ट के बाद उठाया गया। टेक्सटाइल और फैब्रिक ट्रेडिंग का कारोबार करने वाली इस कंपनी की वित्तीय हालत पहले से ही बेहद नाजुक बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के निवेश नॉन-परफॉर्मिंग (non-performing) हैं, लोन की वसूली नहीं हो पा रही है और कंपनी पर टैक्स का भारी बोझ भी है।

COC मीटिंग में फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति पर होगा मंथन

14 फरवरी, 2026 को होने वाली 4th Committee of Creditors (COC) की मीटिंग का एजेंडा काफी अहम है। इसमें CIRP की प्रगति, Information Memorandum (IM) और Resolution and Invitation for Proposals (RFRP) पर चर्चा के साथ-साथ फोरेंसिक ऑडिटर (Forensic Auditor) की नियुक्ति का महत्वपूर्ण बिंदु भी शामिल है। फोरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अब कंपनी के पिछले वित्तीय लेन-देन, फंड डायवर्जन या किसी भी संभावित अनियमितता की गहराई से जांच की जाएगी, जिसने कंपनी को इस मुश्किल स्थिति में डाला है।

फोरेंसिक ऑडिट का मतलब क्या?

फोरेंसिक ऑडिट एक विशेष प्रकार की जांच है, जिसका मुख्य उद्देश्य धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाना है। CIRP के मामलों में, Resolution Professionals (RPs) और COC के लिए यह एक अहम टूल साबित होता है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि किन सौदों या लेन-देन ने कंपनी की वित्तीय स्थिति को कमजोर किया, जैसे कि फर्जी, कम मूल्य वाले या पक्षपातपूर्ण भुगतान। इन ऑडिट के निष्कर्षों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है और यह तय करने में मदद मिलती है कि लेनदारों (creditors) और शेयरधारकों के लिए कितनी वैल्यू (value) उपलब्ध है।

गवर्नेंस संबंधी चिंताएं और कमजोर वित्तीय स्थिति

Radhagobind Commercial Limited पहले से ही गंभीर गवर्नेंस (governance) संबंधी चिंताओं से जूझ रही है। सितंबर 2025 तक प्रमोटर की हिस्सेदारी का शून्य (zero) होना बेहद असामान्य है और यह मैनेजमेंट की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करता है। इसके अलावा, कंपनी लगातार घाटे में रही है और इसका बुक वैल्यू (book value) नेगेटिव (negative) है, यानी देनदारियां संपत्ति से कहीं ज्यादा हैं। कंपनी का रेवेन्यू (revenue) बहुत कम रहा है और घाटा लगातार बना हुआ है, जिसके चलते कुछ फाइनेंशियल एनालिसिस प्लेटफॉर्म्स ने इसे 'STRONG SELL' की रेटिंग दी है।

निवेशकों के लिए जोखिम और आगे का रास्ता

मौजूदा शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि उनके शेयरों की वैल्यू काफी कम हो सकती है या पूरी तरह से समाप्त हो सकती है, क्योंकि IBC के नियमों के तहत लेनदारों का भुगतान होने के बाद ही शेयरधारकों को कुछ मिलने की उम्मीद रहती है। कंपनी पहले से ही CIRP में है, जिसका अर्थ है कि इसका भविष्य अनिश्चित है और यह एक रेजोल्यूशन प्लान (resolution plan) की मंजूरी या लिक्विडेशन (liquidation) पर निर्भर करेगा। फोरेंसिक ऑडिट से स्थिति और अधिक अनिश्चित हो गई है, क्योंकि यह ऐसे मुद्दों का खुलासा कर सकता है जिससे कानूनी कार्रवाई या पुनर्गठन (restructuring) हो सकता है, जो शेयरधारकों की वैल्यू को और कम कर सकता है।

आगे क्या?

निवेशकों को 4th COC मीटिंग के नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, खासकर फोरेंसिक ऑडिट की प्रगति और उससे निकलने वाले निष्कर्षों पर। 39 संभावित रेजोल्यूशन आवेदकों (resolution applicants) की ओर से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOIs) मिलना कंपनी के लिए कुछ बाजार रुचि का संकेत देता है। हालांकि, Radhagobind Commercial Limited का अंतिम भाग्य पेश किए जाने वाले रेजोल्यूशन प्लान की व्यवहार्यता और NCLT की मंजूरी पर निर्भर करेगा। फिलहाल, किसी भी हितधारक (stakeholder) के लिए स्थिति काफी सट्टा (speculative) बनी हुई है।

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