₹1 में 26% हिस्सेदारी, कंपनी का कंट्रोल बदलेगा?
यह ओपन ऑफर एक शेयर खरीद समझौते (Share Purchase Agreement - SPA) के बाद आया है, जो 10 मार्च 2026 को हुआ था। इसके तहत कंपनी के 24.98% शेयर यानी 3,74,69,556 शेयर खरीदे गए हैं। अब अधिग्रहणकर्ता कुल 26.00% हिस्सेदारी हासिल करना चाहते हैं, जिसके लिए वे 3,90,06,240 शेयर तक खरीद सकते हैं। इस पूरे ऑफर के सफल होने पर कुल ₹3.90 करोड़ का ट्रांजैक्शन होगा।
ओपन ऑफर का मतलब है कि कंपनी का कंट्रोल और मैनेजमेंट नए हाथों में जाने वाला है। मौजूदा शेयरधारकों के लिए यह एक एग्जिट (Exit) का मौका है, हालांकि ₹1 का ऑफर प्राइस ऐतिहासिक ट्रेडिंग प्राइस से काफी कम है।
SEBI रेगुलेशन और शेयर होल्डिंग का खेल
यह कदम SEBI (Substantial Acquisition of Shares & Takeovers) रेगुलेशन के तहत उठाया गया है। पिछले कुछ समय से निवेशक जैसे Nishad Jitendra Shah और Rajshree Shah, और Rocksolid Investments जैसी संस्थाएं अपनी होल्डिंग बढ़ा रही थीं। हाल ही में Mani Marketing & Holdings Private Limited ने अपनी 100% हिस्सेदारी बेच दी थी। 10 मार्च 2026 का SPA इन सभी गतिविधियों को एक साथ लाता है, जिसके बाद 24.98% की नई होल्डिंग बनी है।
RGF Capital Markets एक स्मॉल-कैप NBFC है, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹13-14 करोड़ है। कंपनी नेट लॉस (Net Loss) और कम प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) दिखा रही है, साथ ही डेटर्स (Debtors) ज्यादा हैं और प्रमोटर होल्डिंग (Promoter Holding) कम है।
आगे क्या होगा?
- ऑफर पूरा होने के बाद RGF Capital Markets का कंट्रोल और मैनेजमेंट पूरी तरह से अधिग्रहणकर्ताओं को ट्रांसफर हो जाएगा।
- बेचने वाले शेयरधारक अपना कंट्रोल छोड़ देंगे और पब्लिक शेयरहोल्डर (Public Shareholder) के तौर पर री-क्लासिफाई (Re-classify) होंगे।
- कंपनी की भविष्य की रणनीति नए कंट्रोलिंग एंटिटी (Controlling Entity) द्वारा निर्देशित होने की संभावना है।
जोखिम और चुनौतियाँ
- रेगुलेटरी हर्डल्स (Regulatory Hurdles): सबसे बड़ा रिस्क रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) का है, खासकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से। अगर RBI से मंजूरी नहीं मिली तो यह डील रुक सकती है।
- कम ऑफर प्राइस: ₹1 का ऑफर प्राइस कंपनी के ऐतिहासिक हाई (Historical High) और 52-वीक लो (52-Week Low) के करीब है। यह उन शेयरधारकों को शेयर बेचने से रोक सकता है जो SPA का हिस्सा नहीं हैं।
- सख्त टाइमलाइन: डिटेल्ड पब्लिक स्टेटमेंट (Detailed Public Statement - DPS) को 17 मार्च 2026 तक पब्लिश करना होगा, जो कि एक टाइट डेडलाइन (Tight Deadline) है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आगे क्या करें? निवेशकों को 17 मार्च 2026 तक DPS पब्लिश होने पर नज़र रखनी चाहिए। साथ ही RBI से मंजूरी की प्रगति और ओपन ऑफर के टेंडरिंग पीरियड (Tendering Period) के नतीजे देखना महत्वपूर्ण होगा। अधिग्रहणकर्ताओं या कंपनी की ओर से किसी भी नई घोषणा पर भी ध्यान दें।