FY26 में REITs का दबदबा बढ़ा है और फंडरेजिंग **₹9,300 करोड़** तक पहुंच गई है, जबकि दूसरी ओर InvITs ने कुल फंड जुटाने में **21%** की गिरावट दर्ज की है।
भारत के ट्रस्ट-बेस्ड कैपिटल मार्केट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान दो विपरीत रुझान देखने को मिले हैं। जहां REITs ने अपनी पैठ मजबूत की है, वहीं InvITs के मार्केट वॉल्यूम में कमी आई है।
REITs की चमक बरकरार
संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का भरोसा REITs पर बढ़ा है। इन्होंने साल भर में ₹9,300 करोड़ जुटाए हैं। खास बात यह है कि प्रति इश्यू का औसत आकार 31% बढ़कर ₹3,100 करोड़ हो गया है। यह संकेत है कि निवेशक अब स्टेबल और रेंटल इनकम देने वाले पोर्टफोलियो को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं।
InvITs की रणनीति में बदलाव
InvITs के मोर्चे पर कुल फंडरेजिंग 21% घटकर ₹21,026 करोड़ रह गई है। हालांकि, इश्यू की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि स्पॉन्सर्स अब बड़े इश्यूज के बजाय छोटे और टारगेटेड एसेट्स को मॉनेटाइज करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। औसतन एक इश्यू का साइज 28% गिरकर ₹1,752 करोड़ पर आ गया है।
नए रेगुलेशंस से खुलेगा रास्ता?
अगस्त 2026 में SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें REITs और InvITs को निर्माण-धीन (under-construction) थर्ड-पार्टी प्रोजेक्ट्स में निवेश की अनुमति देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, RBI ने भी बैंकों को REITs में लोन देने की अनुमति देने का संकेत दिया है, जिसमें 10% का एक्सपोजर कैप तय किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि REITs की सफलता ऑफिस लीजिंग की मांग पर निर्भर है, जो ग्लोबल इकोनॉमी से जुड़ी है। वहीं, InvITs के छोटे और लगातार होने वाले डील्स के चलते एसेट की क्वालिटी को गहराई से ट्रैक करना अनिवार्य हो गया है। नए रेगुलेटरी नियमों के लागू होने में देरी या सख्ती भविष्य के ग्रोथ पर असर डाल सकती है।
