सरकारी कंपनी REC सोमवार, 7 सितंबर को ब्लॉकचेन-आधारित बॉन्ड जारी करने जा रही है। ₹500 करोड़ के इस पायलट प्रोजेक्ट में RBI की डिजिटल करेंसी (CBDC) का इस्तेमाल होगा, जिससे सेटलमेंट तेज होगा। हालांकि, यह आम निवेशकों के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा संस्थागत निवेशकों तक सीमित है।
बॉन्ड मार्केट में नया डिजिटल दौर
REC लिमिटेड भारतीय डेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव लाने जा रही है। कंपनी का ₹500 करोड़ का यह बॉन्ड इश्यू 7 सितंबर, 2026 को बोली (Bidding) के लिए खुलेगा। इसमें ₹100 करोड़ का बेस इश्यू साइज है, जबकि ₹400 करोड़ तक का ग्रीनशू ऑप्शन रखा गया है। इन बॉन्ड्स की मैच्योरिटी अवधि 1 साल और 8 महीने की है।
कैसे काम करेगा ब्लॉकचेन सेटलमेंट?
यह इश्यू पारंपरिक बॉन्ड मार्केट से काफी अलग है। इसमें ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सेटलमेंट साइकिल खत्म होकर लेनदेन लगभग इंस्टेंट (तत्काल) हो जाएगा। इसके लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की होलसेल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) और 'Demat 2.0' वॉलेट का इस्तेमाल होगा, जिससे बॉन्ड की पूरी लाइफसाइकिल डिजिटल लेजर पर रिकॉर्ड की जाएगी। फिलहाल यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, इसलिए आम रिटेल निवेशक इसमें हिस्सा नहीं ले पाएंगे।
फाइनेंशियल स्थिति और स्टॉक पर नजर
निवेशकों को कंपनी के हालिया नतीजों पर भी ध्यान देना चाहिए। Q1 FY27 में REC का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट ₹4,149.46 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 6.77% कम है। पिछले एक साल में कंपनी का शेयर 14% से 15% तक टूटा है।
जोखिम और चुनौतियां
चूंकि यह तकनीक पहली बार इस्तेमाल हो रही है, इसलिए ऑपरेशनल अनिश्चितताएं और तकनीकी खराबी की आशंका बनी रहती है। साथ ही, इन बॉन्ड्स पर लॉक-इन पीरियड होगा, जिससे शॉर्ट-टर्म में लिक्विडिटी की समस्या आ सकती है। हालांकि, कंपनी की एसेट क्वालिटी मजबूत है और इसका ग्रॉस स्टेज-3 एसेट्स 0.23% पर बना हुआ है, जो इसकी क्रेडिट हेल्थ को बेहतर दर्शाता है।
