REC लिमिटेड के शेयर आज **2.08%** चढ़कर **₹362.50** पर पहुंच गए। कंपनी ने तिमाही नतीजों में भले ही मुनाफा कम दिखाया हो, लेकिन पूरे साल में अच्छी ग्रोथ दर्ज की है और शेयरधारकों को लगातार डिविडेंड (Dividend) दे रही है।
REC के शेयर में आज क्या हुआ?
REC लिमिटेड के शेयरों में सोमवार को अच्छी खरीदारी देखने को मिली। स्टॉक 2.08% की बढ़त के साथ ₹362.50 पर ट्रेड कर रहा था। यह तेजी कंपनी द्वारा मार्च 2026 को समाप्त हुए तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष के नतीजे जारी करने के बाद आई है। पावर फाइनेंसिंग में एक बड़ी कंपनी होने के नाते, REC निफ्टी नेक्स्ट 50 इंडेक्स का भी एक अहम हिस्सा है।
तिमाही नतीजों पर एक नज़र
मार्च 2026 की तिमाही में REC के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में गिरावट आई, जो पिछले साल की इसी अवधि के ₹15,333.54 करोड़ से घटकर ₹14,563.82 करोड़ रह गया। इसी तरह, नेट प्रॉफिट भी पिछले साल के ₹4,309.98 करोड़ की तुलना में घटकर ₹3,375.08 करोड़ हो गया। नतीजतन, प्रति शेयर आय (EPS) भी ₹16.24 से घटकर ₹12.69 रह गई।
पूरे साल का प्रदर्शन रहा दमदार
तिमाही के दबाव के बावजूद, पूरे वित्तीय वर्ष के आंकड़े मजबूत ग्रोथ दिखा रहे हैं। साल भर में कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 5.71% बढ़कर ₹59,584.16 करोड़ हो गया, जबकि नेट प्रॉफिट 2.67% बढ़कर ₹16,308.17 करोड़ दर्ज किया गया। वार्षिक ईपीएस (EPS) बढ़कर ₹61.81 हो गया, जो कि उतार-चढ़ाव वाले तिमाही लेंडिंग साइकिल्स के बावजूद एक स्थिर लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को दर्शाता है।
फाइनेंशियल हेल्थ और शेयरधारकों को रिटर्न
REC अपनी बैलेंस शीट को मजबूत बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पिछले कुछ सालों में प्रति शेयर बुक वैल्यू लगातार बढ़ी है, जो 2022 में ₹257.00 से बढ़कर 2026 में ₹323.01 हो गई है। कंपनी ने अपने डेट-टू-इक्विटी रेशियो को भी घटाकर 6.05 कर लिया है, जो चार साल पहले 6.56 था। रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 19% से 20% के बीच बना हुआ है।
शेयरधारकों को कई डिविडेंड (Dividend) के जरिए नियमित रिटर्न मिलता रहा है। पिछले एक साल में, कंपनी ने फरवरी 2026 और अक्टूबर 2025 में ₹4.60 प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड सहित कई भुगतान किए हैं। डिविडेंड का यह ट्रैक रिकॉर्ड निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।
हालिया डेवलपमेंट और ध्यान देने योग्य बातें
निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि कंपनी नए सब्सिडियरी (Subsidiary) स्थापित कर अपने ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही है। हाल ही में, कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों से कुछ जुर्माने भी मिले हैं, जिन पर ध्यान देना होगा। आगे चलकर, कंपनी की तिमाही लाभ मार्जिन में सुधार की क्षमता, नई सब्सिडियरी का लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू पर असर, और एक्सचेंज कंप्लायंस से जुड़े रेगुलेटरी माहौल को कंपनी कैसे संभालती है, यह देखना अहम होगा।
