REC Limited के शेयरों में बुधवार को **2.2%** का उछाल देखने को मिला है। हाल ही में **₹292.20** के 52-वीक लो (Low) को छूने के बाद स्टॉक ने एक मामूली रिकवरी की है, हालांकि टेक्निकल मोर्चे पर अभी भी चुनौतियां बरकरार हैं।
टेक्निकल हर्डल्स का सामना
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर हाल ही में ₹292.20 के स्तर पर 52-वीक लो बनाने के बाद, बुधवार को REC Limited के शेयरों में कुछ राहत की सांस ली है। फिलहाल स्टॉक ₹299 के स्तर तक पहुंचा है, लेकिन चार्ट पर अभी भी ऊपर की तरफ बड़ी रुकावटें हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि 100-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज एक बड़ी दीवार बना हुआ है। यदि स्टॉक को अपनी तेजी बरकरार रखनी है, तो इसे इस एवरेज के ऊपर टिकना होगा। साथ ही, ₹303 से ₹306 के दायरे में बिकवाली का दबाव (Selling Pressure) बढ़ सकता है, जहां ट्रेडर्स अपने मुनाफे बुक करना चाहेंगे।
बिजनेस रिस्क और चुनौतियां
REC का बिजनेस मॉडल पूरी तरह से पावर सेक्टर पर निर्भर है, जो इसके लिए एक जोखिम भी है। कंपनी का लोन बुक स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (Discoms) के प्रदर्शन से सीधा जुड़ा है। अगर पावर सेक्टर में कोई भी पॉलिसी बदलाव या फाइनेंशियल डिस्ट्रेस आता है, तो इसका असर सीधे REC के मुनाफे पर पड़ेगा।
इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों की चाल का भी NBFCs पर गहरा असर पड़ता है। अगर ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और कंपनी उसे ग्राहकों पर पूरी तरह पास नहीं कर पाती, तो नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर असर दिख सकता है। बाजार के एक्सपर्ट्स की नजरें अब कंपनी के लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी अपडेट्स पर टिकी हैं, जो स्टॉक की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
