मर्जर की रणनीति और आगे की राह
REC लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 6 फरवरी, 2026 को हुई एक अहम बैठक में Power Finance Corporation Limited (PFC) के साथ मर्जर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अपनी सैद्धांतिक (in-principle) मंज़ूरी दे दी है।
यह बड़ा कॉर्पोरेट कदम सीधे तौर पर माननीय वित्त मंत्री द्वारा यूनियन बजट 2026-27 में पब्लिक सेक्टर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) जैसे PFC और REC के पुनर्गठन की ज़रूरत पर दिए गए ज़ोर का नतीजा है। इस प्रस्तावित कंसॉलिडेशन (consolidation) का मुख्य मकसद पब्लिक सेक्टर की वित्तीय संस्थाओं के संचालन का दायरा बढ़ाना और उनकी परिचालन दक्षता (operational efficiency) में सुधार लाना है।
अब REC इस मर्जर के लिए एक विस्तृत प्रस्ताव (detailed proposal) तैयार करने का महत्वपूर्ण काम शुरू करेगा। यह प्रक्रिया सभी लागू कानूनों, नियमों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) के मानदंडों का कड़ाई से पालन करते हुए की जाएगी। इस पुनर्गठन पहल के तहत यह एक महत्वपूर्ण आश्वासन दिया गया है कि मर्जर के बाद बनी कंपनी, कंपनी अधिनियम, 2013 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत 'गवर्नमेंट कंपनी' (Government Company) के रूप में ही पहचानी जाएगी, जो राज्य के निरंतर समर्थन और रणनीतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
भविष्य की ओर एक नज़र:
हालांकि 'इन-प्रिंसिपल' मंज़ूरी एक अहम पहला कदम है, मर्जर का वास्तविक कार्यान्वयन सभी ज़रूरी रेगुलेटरी (regulatory) और वैधानिक (statutory) मंज़ूरियों पर निर्भर करेगा। विस्तृत स्कीम, एक बार फाइनल होने और स्वीकृत होने के बाद, आगे की मंज़ूरी के लिए प्रस्तुत की जाएगी। निवेशक और हितधारक इस कंसॉलिडेशन की प्रगति पर बारीकी से नज़र रखेंगे, जिसमें भारत के महत्वपूर्ण पावर और इन्फ्रास्ट्रक्चर (infrastructure) क्षेत्रों में एक वित्तीय पावरहाउस बनाने की क्षमता है। संयुक्त इकाई के पास बढ़ी हुई वित्तीय ताकत, व्यापक परिचालन क्षमता और बड़े प्रोजेक्ट्स को फंड करने की ज़्यादा क्षमता होने की उम्मीद है, जिससे भारत के आर्थिक विकास और ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) लक्ष्यों में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। इस कंसॉलिडेशन का उद्देश्य संचालन को सुव्यवस्थित करना, ओवरलैप को कम करना और एक मज़बूत वित्तीय संस्थान के लिए तालमेल (synergies) का लाभ उठाना है।
