क्यों लगा जुर्माना?
REC Limited, जो मिनिस्ट्री ऑफ पावर (Ministry of Power) के तहत एक महारत्न पीएसयू (PSU) है, को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान बोर्ड की संरचना से जुड़े नियमों का पालन न करने के लिए दंडित किया है। कंपनी ने एक्सचेंजों को सूचित किया है कि इस अवधि में 92 दिनों तक बोर्ड के सदस्यों की जरूरी संख्या पूरी नहीं थी।
एक्सचेंजों का कड़ा रुख
दोनों एक्सचेंजों ने REC Limited पर अलग-अलग ₹5,42,800 (GST सहित) का जुर्माना लगाया है, जिससे कुल राशि ₹10,85,600 हो गई है। यह जुर्माना 16 मार्च, 2026 को कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार है। यह उल्लंघन 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए था।
नियुक्तियों में देरी बनी वजह
REC Limited ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड में जरूरी डायरेक्टर्स, विशेषकर स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति सीधे कंपनी के नियंत्रण में नहीं है। ये नियुक्तियां भारत के राष्ट्रपति द्वारा मिनिस्ट्री ऑफ पावर के माध्यम से की जाती हैं। इसी वजह से, डायरेक्टर्स की नियुक्ति में हुई देरी के कारण कंपनी बोर्ड कंपोजिशन के नियमों का पालन करने में विफल रही। कंपनी को पिछली तिमाही (30 सितंबर, 2025 को समाप्त) में भी इसी तरह के कारण ₹5.42 लाख का जुर्माना झेलना पड़ा था, जब स्वतंत्र निदेशकों की कमी थी।
आगे क्या हो सकता है?
REC Limited ने एक्सचेंजों से इस जुर्माने के लिए छूट (Waiver) का अनुरोध करने की योजना बनाई है। हालांकि, कंपनी ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि यह फाइन समय पर नहीं चुकाया गया, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे प्रमोटर के शेयर फ्रीज करना या कंपनी के शेयरों का ट्रेडिंग सस्पेंड (Trading Suspension) होना।
साथियों की स्थिति
यह देखना दिलचस्प है कि REC Limited की मूल कंपनी, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC), को भी फरवरी 2024 में RBI द्वारा लिक्विडिटी रिस्क मैनेजमेंट के नियमों के उल्लंघन के लिए ₹8.80 लाख का जुर्माना झेलना पड़ा था। इसी तरह, रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस करने वाली कंपनी IREDA भी सरकारी निगरानी में काम करती है, लेकिन उसका बिजनेस मॉडल थोड़ा अलग है।
