केनरा बैंक ने Reliance Telecom के लोन को 'फ्रॉड' बताया, RBI रिपोर्टिंग का आदेश
Reliance Communications Limited (RCOM) की सब्सिडियरी Reliance Telecom Limited (RTL) एक बार फिर मुश्किलों में घिर गई है। केनरा बैंक (Canara Bank) ने RTL को दिए गए क्रेडिट फैसिलिटीज को 'फ्रॉड' (Fraud) करार दिया है। बैंक की ओर से 27 फरवरी, 2026 को जारी किए गए एक लेटर में RCOM को निर्देश दिया गया है कि इस मामले को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री (Central Fraud Registry) में दर्ज कराया जाए।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब RCOM और RTL दोनों ही कॉरपोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत चल रही हैं। बैंक का मानना है कि रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (Resolution Professional - RP) द्वारा पेश किए गए मोरेटोरियम प्रोटेक्शन (Moratorium Protection) के तर्क मान्य नहीं हैं।
क्या है पूरा मामला?
केनरा बैंक ने Reliance Telecom Limited (RTL) को जारी की गई टर्म लोन फैसिलिटी, जिसकी कुल राशि ₹10,000.00 लाख यानी ₹100 करोड़ थी, को 'फ्रॉड' के तौर पर वर्गीकृत किया है। इस वर्गीकरण के बाद, बैंक ने RCOM को निर्देश दिया है कि RTL का नाम RBI की सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री में शामिल कराने के लिए रिपोर्ट करे।
बैंक का यह कदम इस बात पर जोर देता है कि वह RCOM और RTL की CIRP स्थिति के बावजूद, मोरेटोरियम के तहत मिलने वाली सुरक्षा के दावों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
यह क्यों मायने रखता है?
किसी बड़े बैंक द्वारा 'फ्रॉड' का टैग लगाना, वह भी इंसॉल्वेंसी प्रोसीडिंग्स के बीच, RTL और RCOM दोनों की वित्तीय साख के लिए एक बड़ा झटका है। इस वर्गीकरण से चल रही रेजोल्यूशन योजनाओं में नई बाधाएं आ सकती हैं। साथ ही, बैंक का यह मानना कि मोरेटोरियम प्रोटेक्शन के तर्क मान्य नहीं हैं, CIRP प्रक्रिया के दौरान RCOM के कानूनी बचाव को कमजोर कर सकता है।
पिछली क्या है कहानी?
Reliance Communications (RCOM) लंबे समय से वित्तीय दिक्कतों से जूझ रही है। कंपनी फरवरी 2019 में भारी कर्ज के चलते दिवालिया प्रक्रिया (CIRP) में चली गई थी। हालांकि, यह एक दिलचस्प मोड़ है कि इसी साल जुलाई 2025 में केनरा बैंक ने बॉम्बे हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 'फ्रॉड' का यह वर्गीकरण वापस ले लिया था। हाईकोर्ट ने बैंक से सवाल किया था कि ऐसे फैसले से पहले उधारकर्ता को सुनवाई का मौका क्यों नहीं दिया गया। लेकिन, फरवरी 2026 का यह नया लेटर दर्शाता है कि बैंक को अभी भी इस मामले में गहरी चिंता बनी हुई है।
रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी पहले ही अगस्त 2024 में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी योजनाओं के चलते सिक्योरिटीज मार्केट से 5 साल के लिए प्रतिबंधित हो चुके हैं।
अब क्या बदलेगा?
- केनरा बैंक के 'फ्रॉड' टैग से RCOM और RTL पर रेगुलेटरी जोखिम बढ़ गया है।
- RBI की रजिस्ट्री में रिपोर्ट होने से आगे की जांच तेज हो सकती है।
- इससे लेनदारों (Creditors) का रेजोल्यूशन प्रोसेस पर भरोसा कम हो सकता है।
- मोरेटोरियम पर बैंक का रुख RCOM के CIRP में कानूनी दावों पर असर डाल सकता है।
