Reliance Communications के कर्जदाताओं (CoC) ने Enforcement Directorate (ED) से लगभग ₹7,000 करोड़ की रियल एस्टेट संपत्तियों को रिलीज करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पेक्ट्रम को इनसॉल्वेंसी पूल से बाहर करने के बाद, कर्जदाता अब रिकवरी के लिए इन जमीनों पर निर्भर हैं।
स्पेक्ट्रम से हाथ धोने के बाद बढ़ी मुश्किलें
Reliance Communications (RCom) के लिए इनसॉल्वेंसी की राह और कठिन हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने कंपनी के स्पेक्ट्रम को इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन पूल से बाहर कर दिया है, जो कर्जदाताओं के लिए सबसे कीमती एसेट माना जा रहा था। अब कर्जदाताओं के पास रिकवरी का एकमात्र मुख्य जरिया कंपनी की रियल एस्टेट संपत्तियां बची हैं।
क्या है इन संपत्तियों का गणित?
कर्जदाताओं ने ED के सामने जो अर्जी दी है, उसमें ₹7,000 करोड़ की संपत्तियों का जिक्र है। इसमें नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) की 132.07 एकड़ जमीन सबसे अहम है, जिसकी वैल्यू करीब ₹4,462 करोड़ आंकी गई है। इसके अलावा दिल्ली, चेन्नई, पुणे और ओडिशा में मौजूद संपत्तियों को भी रिलीज करने की मांग की गई है। फिलहाल ये सभी संपत्तियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत ED के पास कुर्क (Attach) हैं, जिसके चलते इन्हें बेचना संभव नहीं है।
लिक्विडेशन का मंडराता खतरा
कंपनी पर करीब ₹33,000 करोड़ का भारी कर्ज है और साल 2019 से ही इसकी इनसॉल्वेंसी प्रक्रिया (CIRP) जारी है। जानकारों का मानना है कि अगर कर्जदाता इन संपत्तियों को रिलीज कराने में नाकाम रहते हैं, तो कंपनी के पास लिक्विडेशन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा, जिससे बैंकों की रिकवरी पर बुरा असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें NCLT की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या ED इन संपत्तियों से अपना कब्जा हटाती है या मामला और उलझता है।
