CBI की कार्रवाई और धोखाधड़ी की रकम
Central Bureau of Investigation (CBI) ने Reliance Communications (RCOM) के दो शीर्ष अधिकारियों - CFO D. Vishwanath और VP Anil Kalya को बैंक धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है। CBI का आरोप है कि इन अधिकारियों ने ₹19,694 करोड़ की हेराफेरी की, जिससे 17 पब्लिक सेक्टर बैंकों को भारी नुकसान हुआ है। अकेले State Bank of India (SBI) को इसमें करीब ₹2,929.05 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।
फंसाने का तरीका और बैंकों पर बोझ
जांच एजेंसियों का मानना है कि फंड की हेराफेरी के लिए शेल कंपनियों (shell companies) और फर्जी ट्रांजैक्शन (bogus transactions) का इस्तेमाल किया गया। इसमें ऐसी सेवाओं के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट (letters of credit) जारी किए गए जो असल में मौजूद ही नहीं थीं। यह मामला RCOM के सात साल से चल रहे इंसॉल्वेंसी (insolvency) रेजोल्यूशन (resolution) को और पेचीदा बना रहा है। कंपनी पर कुल ₹40,410 करोड़ का कर्ज है, जिसमें से ₹28,826 करोड़ का डिफॉल्ट (default) हो चुका है। SBI ने तो नवंबर 2020 में ही RCOM के लोन अकाउंट को 'फ्रॉड' करार दे दिया था।
बड़े फ्रॉड का कनेक्शन
CBI की अनिल अंबानी ग्रुप (Anil Ambani Group) से जुड़ी ₹73,000 करोड़ की बैंक लोन धोखाधड़ी की जांच भी इसी कड़ी का हिस्सा है। इससे संकेत मिलता है कि यह मामला केवल RCOM तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा कर रहा है।
RCOM की माली हालत और भविष्य
कभी एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी रही RCOM अब बेहद कमजोर स्थिति में है। अप्रैल 2026 तक, इसकी मार्केट वैल्यू (market value) सिर्फ ₹270-290 करोड़ रह गई थी, जो इसके पुराने रुतबे का एक छोटा सा अंश है। कंपनी पर 'वैल्यू ट्रैप' (Value Trap) का लेबल लगा है, यानी कम कीमत के बावजूद इसके शेयर में रिकवरी की उम्मीद कम है। RCOM के लेनदारों (creditors) का भविष्य CBI और Enforcement Directorate (ED) की जांच के नतीजों और National Company Law Tribunal (NCLT) से इंसॉल्वेंसी प्लान (resolution plan) को मिलने वाली मंजूरी पर निर्भर करेगा।
