RBL Bank और Bank of Maharashtra ने पहली बार डॉलर-डिनोमिनेटेड बॉन्ड के जरिए **$300 मिलियन** से **$500 मिलियन** तक जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है। RBI की FCNR(B) डिपॉजिट विंडो बंद होने के बाद लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए बैंकों का यह बड़ा कदम है।
विदेशी बाजारों पर नजर
दोनों ही बैंकों ने इंटरनेशनल मार्केट में कदम रखने की रणनीति बनाई है। ये बैंक 5-साल के डॉलर बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहे हैं, ताकि लंबी अवधि के लिए कैपिटल सुरक्षित किया जा सके। यह बदलाव 31 अगस्त, 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्पेशल Foreign Currency Non-Resident (FCNR) डिपॉजिट विंडो बंद होने के बाद आया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सालों से भारतीय बैंक शॉर्ट-टर्म फॉरेन करेंसी लोन के जरिए अपनी लिक्विडिटी को मैनेज करते आए थे। अब विंडो बंद होने के कारण, बैंकों को अपनी बैलेंस शीट को स्टेबल रखने के लिए लॉन्ग-टर्म डेट की जरूरत है। इसी कड़ी में RBL Bank ने $1 बिलियन का मीडियम टर्म नोट प्रोग्राम सेट किया है, वहीं Bank of Maharashtra ने $500 मिलियन की सुविधा तैयार की है।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
यह इन दोनों बैंकों के लिए पहला मौका है, इसलिए 'एक्जीक्यूशन रिस्क' बना हुआ है। इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स इनके क्रेडिट प्रोफाइल को कैसे देखते हैं, इस पर बॉन्ड की सफलता निर्भर करेगी। इसके अलावा, UCO Bank और Bank of India जैसे अन्य बैंक भी विदेशी पूंजी जुटाने की होड़ में शामिल हो गए हैं।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है बॉन्ड की 'फाइनल प्राइसिंग' और 'कूपन रेट' पर नजर रखना। यदि मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ा, तो बॉरोइंग कॉस्ट बढ़ने से आने वाली तिमाही में बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
