RBL Bank ने दूसरी तिमाही के लिए शानदार नतीजे पेश किए हैं। बैंक का नेट प्रॉफिट बढ़कर **₹482 करोड़** हो गया है, जिसमें विदेशी मुद्रा डिपॉजिट का बड़ा योगदान है। हालांकि, ग्रोथ के साथ बैंक की कुछ सावधानियां भी सामने आई हैं।
शानदार प्रदर्शन की इनसाइड स्टोरी
सितंबर 2026 को समाप्त हुई दूसरी तिमाही में RBL Bank ने दमदार बाजी मारी है। पिछले साल इसी तिमाही में बैंक का मुनाफा ₹179 करोड़ था, जो इस बार 170% बढ़कर ₹482 करोड़ तक पहुंच गया है। इस उछाल के पीछे मुख्य वजह $3.4 बिलियन की भारी-भरकम FCNR(B) डिपॉजिट रही, जिसने बैंक की बैलेंस शीट को विस्तार दिया।
बैंकिंग के मुख्य आंकड़े
बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 37.4% बढ़कर ₹2,131 करोड़ हो गई है। इसका असर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर भी दिखा, जो पिछले साल के 4.51% से सुधरकर 4.61% हो गया। बैंक के ग्रॉस एडवांस में 42% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹1.42 लाख करोड़ पहुंच गया।
एसेट क्वालिटी में भी बड़ा सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस NPA जो पहले 2.32% था, वह अब घटकर 1.02% पर आ गया है। हालांकि, रिस्क मैनेजमेंट के लिए बैंक ने अपने प्रोविजन्स को 53% बढ़ाकर ₹766.5 करोड़ कर दिया है।
रिस्क फैक्टर और चिंताएं
निवेशकों को इन नतीजों की बारीकियों को समझने की जरूरत है। बैंक की ग्रोथ का एक बड़ा हिस्सा FCNR(B) डिपॉजिट पर आधारित है, जो कि एक वन-टाइम कैपिटल इन्फ्लक्स जैसा दिख रहा है। इसके अलावा, CASA रेश्यो घटकर 27.2% पर आ गया है, जो संकेत देता है कि बैंक अब महंगे टर्म डिपॉजिट्स पर निर्भर है। इसका सीधा असर भविष्य में मार्जिन्स पर पड़ सकता है।
आगे की रणनीति
MD और CEO R. Subramaniakumar ने स्पष्ट किया है कि अब बैंक बड़े कॉर्पोरेट क्लाइंट्स पर फोकस कर रहा है। Emirates NBD जैसे पार्टनर्स के सहयोग से बैंक की पूंजी स्थिति मजबूत हुई है। अब देखना यह होगा कि बैंक इस मोमेंटम को आने वाली तिमाहियों में कैसे बरकरार रखता है।
