RBI का बड़ा ऐलान: डिजिटल फ्रॉड में अब ₹25,000 तक का कवर, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा!

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा ऐलान: डिजिटल फ्रॉड में अब ₹25,000 तक का कवर, ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल पेमेंट्स में ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। RBI ने एक नया कंज्यूमर प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क (consumer protection framework) पेश किया है, जिसके तहत छोटे-मोटे डिजिटल फ्रॉड (digital fraud) में हुए नुकसान के लिए **₹25,000** तक का कंपनसेशन (compensation) दिया जाएगा। इस नई पहल में ग्राहक, बैंक और केंद्रीय बैंक के बीच लायबिलिटी (liability) शेयर की जाएगी।

डिजिटल इंडिया की रफ्तार को और मजबूती देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और ग्राहकों की चिंताओं को देखते हुए, RBI एक नया फ्रेमवर्क ला रहा है जिसके तहत छोटे-मोटे डिजिटल ट्रांजेक्शन (transaction) में हुए नुकसान के लिए कंपनसेशन दिया जाएगा।

₹25,000 तक का कंपनसेशन कैसे मिलेगा?

इस नई स्कीम के तहत, ग्राहकों को ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकता है। इसमें नुकसान की भरपाई में ग्राहक, बैंक और खुद RBI के बीच ज़िम्मेदारी बांटी जाएगी। RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक, ग्राहक को 15% नुकसान उठाना होगा, बैंकों को भी 15% और बाकी बचे 70% का भुगतान RBI करेगा, जो कि ₹25,000 की लिमिट तक होगा। इस मॉडल का मकसद छोटे ग्राहकों को फौरी राहत देना और बैंकों को फ्रॉड रोकने के लिए और बेहतर सिस्टम बनाने के लिए प्रेरित करना है।

क्यों उठाया RBI ने यह कदम?

डिजिटल पेमेंट्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही फ्रॉड के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। मार्च 2024 में खत्म हुए फाइनेंशियल ईयर (financial year) में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड का कुल मूल्य ₹14.57 अरब तक पहुंच गया था। ऐसे में RBI का यह कदम डिजिटल फाइनेंशियल सर्विसेज को अपनाने के लिए लोगों के डर को कम करेगा और उनके विश्वास को मजबूत करेगा, जो भारत के आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।

सिर्फ कंपनसेशन ही नहीं, और भी सुरक्षा उपाय

कंपनसेशन के अलावा, RBI तीन मोर्चों पर रेगुलेटरी (regulatory) कदम उठा रहा है। इसमें मिस-सेलिंग (mis-selling) के मामले, लोन रिकवरी एजेंट्स (loan recovery agents) का व्यवहार और अनऑथोराइज्ड ट्रांजेक्शन (unauthorized transaction) की स्थिति में ग्राहकों की लायबिलिटी (liability) को लेकर ड्राफ्ट गाइडलाइंस (draft guidelines) जारी की जाएंगी। साथ ही, डिजिटल पेमेंट की सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए एक डिस्कशन पेपर (discussion paper) भी जारी किया जाएगा, जिसमें 'लैग्ड क्रेडिट्स' (lagged credits) और सीनियर सिटीजन्स (senior citizens) जैसे कमजोर वर्गों के लिए एडिशनल ऑथेंटिकेशन (additional authentication) जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है।

डिजिटल इकोसिस्टम और भविष्य

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के नेतृत्व में भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम (ecosystem) जबरदस्त ग्रोथ देख रहा है। 2025 के अंत तक हर महीने 18 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन प्रोसेस हो रहे हैं, जो देश के कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन का लगभग 85% है। इस ग्रोथ के साथ फ्रॉड की घटनाएं भी बढ़ी हैं। RBI के ये नए कदम, जैसे कि NPCI जैसी संस्थाओं द्वारा AI-बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम (AI-driven fraud detection systems) का इस्तेमाल और प्रस्तावित कंपनसेशन फ्रेमवर्क, कंज्यूमर ट्रस्ट (consumer trust) को बनाए रखने और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन (digital transformation) की सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह उम्मीद की जाती है कि इन उपायों से भारत डिजिटल पेमेंट्स और फाइनेंशियल इन्क्लूजन (financial inclusion) में अपनी ग्लोबल लीडरशिप को और मजबूत करेगा।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.