सरकारी खजाने को बड़ी राहत, पर क्या यह स्थायी है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही सरकार को रिकॉर्ड ₹2.9 लाख करोड़ से ₹3.2 लाख करोड़ के बीच डिविडेंड ट्रांसफर करने वाला है। यह पैसा मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा (फॉरेन एक्सचेंज) के सफल लेन-देन से कमाया गया है। इससे सरकार के खजाने को तो मजबूती मिलेगी, लेकिन देश के वित्तीय हालात पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि सरकार अपने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को काबू में रखने के लक्ष्य को शायद पार न कर पाए।
क्या RBI के डिविडेंड पर निर्भरता बढ़ रही है?
वित्तीय मामलों के जानकार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सरकार RBI से मिलने वाले डिविडेंड पर लगातार ज्यादा निर्भर होती जा रही है। पिछले दो दशकों में यह रकम काफी बढ़ी है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकार कमाई के स्थायी स्रोतों से दूर हो रही है। यह ट्रेंड देश के लंबी अवधि के वित्तीय स्वास्थ्य और केंद्रीय बैंक से मिलने वाली असाधारण आय के बिना सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता पर भी सवाल खड़े करता है।
घाटे का लक्ष्य चूकने की आशंका
माना जा रहा है कि भारी भरकम डिविडेंड मिलने के बावजूद, ज्यादातर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि भारत का राजकोषीय घाटा सरकार के तय लक्ष्य से अधिक हो सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कमजोर होता रुपया और सरकारी खर्चों में संभावित वृद्धि को इसके मुख्य कारण बताया जा रहा है। अनुमान है कि यह घाटा GDP का 4.7% तक पहुंच सकता है, जो पिछले वर्षों के आंकड़ों और सरकार के 4.3% के लक्ष्य से अधिक हो सकता है। कुछ विश्लेषक तो इसे 5% तक पहुंचने की भी संभावना जता रहे हैं, जो देश के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों को दर्शाता है।
RBI की कमाई का गणित
RBI की बढ़ी हुई कमाई का राज अमेरिकी डॉलर की बिक्री की उसकी रणनीति में छिपा है। केंद्रीय बैंक ने उन डॉलर को बेचा है जिन्हें उसने ऐतिहासिक रूप से कम कीमत पर खरीदा था। मौजूदा ऊंचे एक्सचेंज रेट के माहौल में इससे उसे काफी मुनाफा हुआ है। हालांकि, यह तरीका सरकार के खजाने को फौरी राहत तो देता है, लेकिन देश की वास्तविक वित्तीय स्थिति को छुपा सकता है। कुछ लोग इसे लंबी अवधि की रणनीति के बजाय एक शॉर्ट-टर्म समाधान मान रहे हैं।
टैक्स कलेक्शन: वित्तीय स्थिरता की असली नींव
विशेषज्ञों का जोर है कि वित्तीय प्रबंधन के लिए टैक्स कलेक्शन को मजबूत करना सबसे जरूरी है, न कि केंद्रीय बैंक के मुनाफे पर निर्भर रहना। RBI से मिलने वाला डिविडेंड भले ही जरूरी मदद दे, लेकिन स्थायी वित्तीय अनुशासन के लिए टैक्स राजस्व को बढ़ाना और सरकारी खर्चों को काबू में रखना आवश्यक है। केंद्रीय बैंक से मिलने वाली इस एकमुश्त राशि पर निर्भरता, कमाई के स्रोतों को मजबूत करने और खर्चों को नियंत्रित करने के लिए बड़े संरचनात्मक सुधारों की जरूरत को रेखांकित करती है, ताकि लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
