क्या है RBI का नया प्रस्ताव?
RBI के एक नए डिस्कशन पेपर में यह प्रस्ताव आया है कि अगर आप ₹10,000 से ज़्यादा की रकम किसी ऐसे व्यक्ति या अकाउंट में भेज रहे हैं, जिसे आपने पहले कभी पैसे नहीं भेजे हैं, तो उस पेमेंट को तुरंत अप्रूव होने में 1 घंटा लग सकता है। RBI का मानना है कि यह 'गोल्डन आवर' (Golden Hour) या 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' (Cooling-off Period) फ्रॉडस्टर्स (Fraudsters) को पैसे ट्रांसफर होने से रोकेगा, ताकि ग्राहक ट्रांजैक्शन को रिव्यू करके कैंसल कर सके।
फ्रॉड का बढ़ता जाल और RBI की चिंता
डिजिटल फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। 2025 में लगभग 2.8 मिलियन (28 लाख) फ्रॉड के मामले सामने आए, जिनमें ₹22,931 करोड़ से ज़्यादा का नुकसान हुआ। खास बात यह है कि कुल फ्रॉड वैल्यू का लगभग 98.5% उन ट्रांजैक्शंस से हुआ जो ₹10,000 से ऊपर थे, हालांकि ऐसे मामलों की संख्या कुल फ्रॉड मामलों का केवल 45% थी। RBI को लगता है कि इस देरी से ऐसे बड़े अमाउंट वाले फ्रॉड को रोका जा सकता है।
इंडस्ट्री में क्यों है डर?
UPI की सबसे बड़ी खूबी उसकी स्पीड और आसानी है, जिसने इसे भारत में इतना पॉपुलर बनाया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 1 घंटे की देरी से UPI का पूरा फ्लो बिगड़ जाएगा। इससे आम ग्राहकों को परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिन्हें रोज़ाना बड़े अमाउंट के कई ट्रांजैक्शन करने पड़ते हैं।
इसके अलावा, यह भी डर है कि चालाक फ्रॉडस्टर्स (Fraudsters) इस नियम को भी बायपास (Bypass) करने का तरीका ढूंढ लेंगे। वे या तो आपको किसी खास लिस्ट (Whitelist) में जोड़ने के लिए मजबूर कर सकते हैं या आपके डिवाइस का रिमोट एक्सेस (Remote Access) लेकर पेमेंट को अपनी मर्ज़ी से अप्रूव करवा सकते हैं। ऐसे में, देरी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
क्या हैं दूसरे समाधान?
कई Fintech लीडर्स और बैंकरों का सुझाव है कि RBI को हर ट्रांजैक्शन पर देरी लागू करने के बजाय, रिस्क-बेस्ड (Risk-based) तरीके अपनाने चाहिए। यानी, ट्रांजैक्शन का अमाउंट, डिवाइस डेटा, लोकेशन और यूजर के व्यवहार जैसे फैक्टर को एनालाइज़ करके केवल उन्हीं हाई-रिस्क (High-Risk) पेमेंट्स को ब्लॉक या डिले (Delay) किया जाए। कुछ एक्सपर्ट्स ने कहा कि इस देरी की लिमिट को ₹25,000 या उससे ज़्यादा भी किया जा सकता है।
यह एक डिस्कशन पेपर है और RBI 8 मई तक इंडस्ट्री से फीडबैक मांगेगा। उम्मीद है कि इसके बाद कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जिससे सुरक्षा भी बढ़े और UPI की स्पीड और आसानी बनी रहे।