RBI ने यह फैसला ICICI Prudential Asset Management Company Limited और ICICI Bank Limited से जुड़ी ग्रुप की अन्य कंपनियों के लिए सुनाया है। इसके तहत, ये संस्थाएं मिलकर Federal Bank के पेड-अप शेयर कैपिटल या वोटिंग राइट्स का 9.95% तक अधिग्रहण कर सकती हैं। यह डेवलपमेंट Federal Bank के शेयर होल्डिंग स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और यह दिखाता है कि बड़े फाइनेंशियल ग्रुप्स इस बैंक में दिलचस्पी ले रहे हैं।
हालांकि, इस अप्रूवल के साथ कुछ अहम शर्तें भी जुड़ी हुई हैं। अधिग्रहण करने वाली कंपनियों को बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949, RBI के कमर्शियल बैंकों में शेयरहोल्डिंग संबंधी नए नियमों (2025), फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (FEMA) और SEBI के सभी रेगुलेशंस का कड़ाई से पालन करना होगा।
इस डील का मुख्य रिस्क यह है कि अधिग्रहण करने वाली संस्थाओं को सभी रेगुलेटरी नियमों का पूरी तरह से पालन करना होगा। किसी भी चूक से रेगुलेटरी जांच हो सकती है या अप्रूवल रद्द भी हो सकता है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स इस बात पर भी नजर रखेंगे कि ICICI ग्रुप इस स्टेक को कैसे एक्वायर करता है और इसका Federal Bank के फ्यूचर स्ट्रेटेजी और फैसलों पर क्या असर पड़ेगा।
इन्वेस्टर्स को सलाह है कि वे ICICI ग्रुप द्वारा स्टेक एक्विजिशन की वास्तविक प्रगति पर नजर रखें। इस कदम से Federal Bank के फ्यूचर पार्टनरशिप, कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप और ओवरऑल कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर असर पड़ सकता है।