Reserve Bank of India (RBI) ने बैंकों को आगाह किया है कि वे लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए बेहतर रिस्क प्राइसिंग और मजबूत इंटरनल गवर्नेंस पर ध्यान केंद्रित करें। रेगुलेटर का मानना है कि क्रेडिट ग्रोथ के साथ-साथ डिपॉजिट बेस को सुरक्षित रखना बैंकों की स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि टिकाऊ विकास तभी संभव है जब बैंक रिस्क प्राइसिंग और मजबूत अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स को प्राथमिकता दें। हाल ही में डिप्टी गवर्नर Swaminathan J ने कहा कि देश की इकोनॉमी के लिए तेजी से क्रेडिट ग्रोथ जरूरी है, लेकिन इसे बैंकों की लंबी अवधि की सेहत की कीमत पर नहीं किया जा सकता।
रिस्क प्राइसिंग क्यों है जरूरी?
RBI का साफ मानना है कि बैंकों को लोन देते समय ब्याज दरें और शर्तें ऐसी रखनी चाहिए जो उधारकर्ता के जोखिम स्तर (Risk Level) को सही तरीके से दर्शाती हों। जल्दबाजी में लोन बुक बढ़ाने के चक्कर में अगर बैंकों ने रिस्क को नजरअंदाज किया, तो भविष्य में यह सिस्टमिक रिस्क बन सकता है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि रेगुलेटर अब 'क्वालिटी' क्रेडिट ग्रोथ को 'वॉल्यूम' से ज्यादा अहमियत दे रहा है। हालांकि इससे शॉर्ट टर्म में लोन ग्रोथ धीमी लग सकती है, लेकिन यह एसेट क्वालिटी को बेहतर बनाकर भविष्य के एनपीए (NPA) के खतरे को काफी कम कर देगा।
डिजिटल रिस्क और डेटा सुरक्षा पर निगरानी
जैसे-जैसे बैंक फिनटेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर लोन बांट रहे हैं, RBI ने साइबर सिक्योरिटी और डेटा प्रोटेक्शन पर फोकस बढ़ा दिया है। रेगुलेटर ने साफ किया है कि थर्ड-पार्टी ऐप्स या आउटसोर्सिंग का उपयोग करने का मतलब यह नहीं है कि बैंक अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं। बैंकों को अपने 'मेकर-चेकर' सिस्टम को और भी मजबूत बनाना होगा ताकि डिजिटल लेंडिंग की रफ्तार में क्रेडिट चेक जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं न छूटें।
डिपॉजिट फ्रैंचाइजी पर RBI की नजर
रेगुलेटर ने बैंकों को सलाह दी है कि वे सिर्फ बल्क डिपॉजिट या महंगे फंड पर निर्भर न रहें। एक मजबूत और विविधतापूर्ण डिपॉजिट बेस ही बैंकों को मार्जिन की अस्थिरता से बचा सकता है। यह बैलेंस शीट का वह हिस्सा है जो सीधे तौर पर बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को प्रभावित करता है।
आने वाले समय में जब बैंक अपनी तिमाही नतीजे पेश करेंगे, तो निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मैनेजमेंट अपनी अंडरराइटिंग प्रोसेस और डिजिटल सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठा रहा है।
