RBI का बड़ा दांव! NRI डिपॉजिट पर शानदार ऑफर, Forex Reserve बढ़ाने की तैयारी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI का बड़ा दांव! NRI डिपॉजिट पर शानदार ऑफर, Forex Reserve बढ़ाने की तैयारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में डॉलर का फ्लो बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। RBI ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स पर नए इंसेंटिव्स का ऐलान किया है, जिसका मकसद फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को मजबूत करना है। पिछले कुछ समय में ये रिजर्व घटकर लगभग **$682 बिलियन** तक पहुंच गए थे।

Detailed Coverage

FCNR(B) स्कीम में क्या हैं नए बदलाव?

RBI, नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRI) के लिए फौरन करेंसी डिपॉजिट्स को और आकर्षक बनाने के लिए जून से लेकर जुलाई 2026 के अंत तक कई कदम उठा रहा है। इसका सीधा असर FCNR(B) यानी फॉरेन करेंसी (नॉन-रेजिडेंट) अकाउंट (बैंक्स) स्कीम पर दिखेगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व दबाव में है। फरवरी 2026 में यह $728 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर था, जो जून 2026 तक घटकर लगभग $682 बिलियन रह गया था। इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में अमेरिकी डॉलर को जमा करना है।

हेजिंग कॉस्ट में छूट का असर

जून की शुरुआत में, RBI ने करेंसी हेजिंग कॉस्ट को खुद वहन करना शुरू कर दिया, जो आमतौर पर सालाना 3% से 3.5% के बीच होती है। पहले यह खर्च डिपॉजिटर या बैंकों को उठाना पड़ता था। इस बोझ को हटाकर, RBI ने बैंकों को इन डिपॉजिट्स पर ज्यादा ब्याज दरें देने का मौका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, FCNR(B) डिपॉजिट्स पर ब्याज दरें अब 7.1% तक पहुंच गई हैं, जबकि साल की शुरुआत में यह 4% से भी कम थीं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे बड़े बैंक भी इन बदलावों के अनुसार अपनी स्कीम्स को अपडेट कर रहे हैं। इसके अलावा, RBI ने बैंकों को इन खास डिपॉजिट्स पर कैश रिजर्व रेशियो (CRR) और स्टेट्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) रखने की अनिवार्यता से भी छूट दी है, जिससे बैंकों के पास लगाने के लिए ज्यादा लिक्विडिटी उपलब्ध होगी।

लेवरेज और ऑफशोर बोरिंग की सुविधा

इसके बाद, 23 जून को RBI ने एक लेवरेज फैसिलिटी भी शुरू की। इसके तहत, बैंक FCNR(B) डिपॉजिट्स के बदले लोन या स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट (SBLC) की पेशकश कर सकते हैं। इस स्ट्रक्चर से NRI डिपॉजिटर्स अपने डिपॉजिट्स को ऑफशोर लोन के लिए कोलैटरल के तौर पर इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि, इससे शुरुआती पूंजी पर मिलने वाला रिटर्न काफी बढ़ सकता है, लेकिन यह डिपॉजिटर के लिए प्रक्रिया को थोड़ा जटिल बना सकता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि इस लेवरेज का फायदा ऑफशोर बोरिंग की मौजूदा लागत पर निर्भर करेगा, जो हाल के दिनों में बढ़ी है और डिपॉजिटर के फाइनल नेट रिटर्न को प्रभावित कर सकती है।

नॉन-रेजिडेंट एक्सटर्नल (NRE) अकाउंट्स के विपरीत, जो रुपये में होते हैं और करेंसी के उतार-चढ़ाव का जोखिम रखते हैं, FCNR(B) डिपॉजिट्स विदेशी करेंसी में ही रखे जाते हैं। यह व्यवस्था डिपॉजिटर्स को एक्सचेंज रेट की अस्थिरता से बचाती है, क्योंकि मूल राशि और ब्याज दोनों उसी विदेशी करेंसी में वापस मिलते हैं जिसमें डिपॉजिट किया गया था।

फिलहाल, इन बढ़ी हुई ब्याज दरों की पेशकश 30 सितंबर तक मान्य है, और करेंसी स्वैप फैसिलिटी 16 अक्टूबर तक उपलब्ध रहेगी। निवेशक और डिपॉजिटर्स इस पर नजर रख सकते हैं कि बैंक कितनी तेजी से इन फंड्स को जुटाते हैं और क्या ये उपाय समय-सीमा नजदीक आते-आते फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को स्थिर या बढ़ाने में कामयाब होते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.