RBI अब होम लोन की मंजूरियों में क्लाइमेट रिस्क को शामिल करने की तैयारी में है। भारत में होम लोन का पोर्टफोलियो **₹40.07 लाख करोड़** के आंकड़े को पार कर गया है, और अब बाढ़ या अत्यधिक गर्मी जैसे खतरों के चलते बैंकों के रिस्क असेसमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
होम लोन सेक्टर पर क्लाइमेट रिस्क का साया
जुलाई 2026 तक भारत में होम लोन का कुल पोर्टफोलियो ₹40.07 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो सालाना 9.6% की ग्रोथ दिखा रहा है। हालांकि, RBI की नजर अब इस बात पर है कि क्लाइमेट चेंज का सीधा असर प्रॉपर्टी और कर्ज चुकाने की क्षमता पर कैसे पड़ रहा है।
क्यों चिंता में है RBI?
RBI के 2022 के एक पायलट स्टडी से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए थे। अगर बाढ़ जैसे हालात पैदा होते हैं, तो बैंकों को होने वाला क्रेडिट लॉस 66.1% तक बढ़ सकता है। यह सिर्फ प्रॉपर्टी का नुकसान नहीं, बल्कि एक बड़ा फाइनेंशियल शॉक है जो कर्जदार की लोन चुकाने की ताकत छीन सकता है।
क्या है 'RB-CRIS' सिस्टम?
इस जोखिम को भांपने के लिए आरबीआई एक नया डेटा सिस्टम विकसित कर रहा है, जिसे RB-CRIS (Reserve Bank Climate Risk Information System) कहा जा रहा है। अभी तक बैंकों के पास प्रॉपर्टी लोकेशन के हिसाब से पर्यावरण संबंधी खतरों का कोई सेंट्रलाइज्ड डेटा नहीं है। यह सिस्टम चक्रवात और समुद्र के जलस्तर बढ़ने जैसी चुनौतियों की पहचान करने में बैंकों की मदद करेगा।
घर खरीदारों और निवेशकों पर क्या असर होगा?
आने वाले समय में होम लोन लेने का तरीका बदल सकता है। बैंक अब लोन जारी करने से पहले ही प्रॉपर्टी के रिस्क प्रोफाइल को ध्यान में रखेंगे। इसका सीधा असर Loan-to-Value (LTV) रेशियो और भविष्य में ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि अब घर खरीदते समय सिर्फ लोकेशन और बजट ही नहीं, बल्कि 'भारत गृह रक्षा' (Bharat Griha Raksha) जैसी बीमा पॉलिसी और प्रॉपर्टी की क्लाइमेट सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी होगी।
