भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज कर्ज वसूली एजेंटों के व्यवहार को लेकर कड़े कदम उठाने की घोषणा की है। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए, RBI जल्द ही नए ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करने वाला है, जिनका मकसद ग्राहकों को अनुचित वसूली के तरीकों से बचाना और डिजिटल फ्रॉड के मामलों में ₹25,000 तक का सुरक्षा कवच प्रदान करना है।
बदसलूकी पर लगेगी लगाम
कर्जदारों को वसूली एजेंटों से मिल रही बदसलूकी और उत्पीड़न की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। ये एजेंट अक्सर ग्राहकों को बार-बार फोन करके, धमकी देकर या सार्वजनिक रूप से अपमानित करके कर्ज वसूलने की कोशिश करते हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, केंद्रीय बैंक तीन अहम ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी करेगा, जो लोन की गलत बिक्री (mis-selling), रिकवरी एजेंटों के बर्ताव और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांजैक्शन में कस्टमर की देनदारी को लेकर होंगी। मौजूदा नियमों में एजेंटों के काम के घंटे तय हैं और उन्हें परेशान करने की मनाही है, लेकिन इनका पालन ठीक से नहीं हो पा रहा था। नए नियम वित्तीय संस्थानों को उनके एजेंटों के गलत कामों के लिए सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराएंगे।
ग्राहकों के लिए 'सुरक्षा कवच'
सिर्फ लोन की वसूली के तरीके ही नहीं, बल्कि RBI वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री (mis-selling) पर भी लगाम कसने की तैयारी में है। कई बार ग्राहकों को उनकी जरूरत न होने पर भी लोन, बीमा या निवेश योजनाएं बेची जाती हैं, जिससे वे मुश्किल में पड़ जाते हैं। इसके अलावा, एक ऐसा फ्रेमवर्क भी बनाया जा रहा है, जिससे ग्राहकों को छोटे-मोटे फ्रॉड वाले इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में हुए नुकसान की भरपाई ₹25,000 तक की जा सकेगी। यह कदम डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।
RBI डिजिटल पेमेंट को और भी सुरक्षित बनाने के लिए एक डिस्कशन पेपर भी जारी करने की योजना बना रहा है। इसमें शायद कस्टमर ऑथेंटिकेशन को और मजबूत करने और सीनियर सिटीजन जैसे संवेदनशील ग्राहकों के लिए कुछ ट्रांजैक्शन में देरी जैसे उपायों पर भी विचार किया जा सकता है।