RBI ने बैंकों और NBFCs के लिए साइबर सिक्योरिटी ऑडिट के नियम कड़े कर दिए हैं। AI के दौर में बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, साथ ही RBI ने FCNR डिपॉजिट की रिपेमेंट को लेकर भी स्थिति साफ कर दी है।
डिजिटल सुरक्षा पर सख्त पहरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पैदा हो रहे नए खतरों को देखते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने वित्तीय संस्थानों के लिए सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया है। सेंट्रल बैंक ने बैंकों और NBFCs को निर्देश दिए हैं कि वे अब अपने ऑडिट साइकिल को तेज करें और सुरक्षा पैच (Security Patches) को तुरंत लागू करें। यह कदम उन ऑटोनॉमस AI एजेंट्स को रोकने के लिए उठाया गया है, जो पारंपरिक सुरक्षा लेयर्स को तोड़कर अनधिकृत कमांड दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए इसका सीधा मतलब है कि बैंकों को अब अपनी IT इंफ्रास्ट्रक्चर और सिक्योरिटी टीम पर खर्च बढ़ाना होगा। हालांकि ये कदम ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन आने वाली तिमाहियों में यह बैंकों के ऑपरेशनल खर्चों पर असर डाल सकता है।
फॉरेक्स रिजर्व और FCNR का भरोसा
साइबर सुरक्षा के अलावा, RBI ने विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर भी आश्वस्त किया है। फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) बैंक डिपॉजिट की रिपेमेंट को लेकर चल रही चिंताओं पर विराम लगाते हुए RBI ने बताया कि उनके पास पर्याप्त बफर मौजूद है।
सेंट्रल बैंक ने अपनी हालिया विंडो के तहत $132.98 बिलियन की राशि जमा की है। इन डिपॉजिट्स की औसत मैच्योरिटी 4 साल से ज्यादा है, जिससे RBI को इन्हें आसानी से निपटाने में मदद मिलेगी। सर्विसेस एक्सपोर्ट और रेमिटेंस में आ रही लगातार तेजी के चलते बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी का कोई दबाव नहीं दिख रहा है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
