RBI स्वैप फैसिलिटी में $20.7 अरब का इनफ्लो, विदेशी बैंकों का दबदबा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI स्वैप फैसिलिटी में $20.7 अरब का इनफ्लो, विदेशी बैंकों का दबदबा

17 जुलाई तक RBI की कंसेशनल स्वैप फैसिलिटी के जरिए भारत में $20.72 बिलियन का विदेशी मुद्रा इनफ्लो आया है। इसमें विदेशी बैंकों का योगदान $17 बिलियन से ज़्यादा रहा है, जिन्होंने अपनी ऑफशोर फंडिंग का फायदा उठाया। हालांकि, यह साफ नहीं है कि यह पैसा कितना फ्रेश इनफ्लो है और कितना मौजूदा डिपॉजिट का रिन्यूअल।

Detailed Coverage

RBI की स्वैप फैसिलिटी का कमाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नई कंसेशनल स्वैप फैसिलिटी ने बैंकिंग सेक्टर में खूब दिलचस्पी दिखाई है। 17 जुलाई 2026 तक, इस सुविधा के जरिए $20.72 बिलियन का विदेशी मुद्रा इनफ्लो जुटाने में सफलता मिली है। जून की शुरुआत में लॉन्च की गई इस लिक्विडिटी मेज़र (liquidity measure) का मकसद ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितताओं के बीच भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को मजबूत करना और बैलेंस ऑफ पेमेंट को स्थिर रखना है।

विदेशी बैंकों का बड़ा योगदान

इस पहल में विदेशी बैंकों का दबदबा रहा है। उन्होंने कुल इनफ्लो में से $17 बिलियन से ज़्यादा का योगदान दिया है। इसकी वजह यह है कि घरेलू बैंकों की तुलना में उन्हें ऑफशोर डॉलर फंडिंग आसानी से मिल जाती है। पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने भी अपनी ओवरसीज ब्रांचों और गिफ्ट सिटी (GIFT City) में अपनी मौजूदगी का फायदा उठाकर इस फैसिलिटी का इस्तेमाल किया है। हालांकि, छोटे बैंकों, जिनकी कोई इंटरनेशनल फुटप्रिंट नहीं है, उन्हें FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने में ज़्यादा दिक्कतें आईं।

कुल $20.72 बिलियन में से, $17.406 बिलियन फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) डिपॉजिट से आए हैं। बाकी की रकम में $1.970 बिलियन ओवरसीज फॉरेन करेंसी बोरिंग्स (Overseas Foreign Currency Borrowings) और $1.342 बिलियन एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (External Commercial Borrowings) शामिल हैं।

इनफ्लो की क्वालिटी पर सवाल?

हालांकि RBI फैसिलिटी को लेकर शुरुआती नतीजे मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि यह इनफ्लो कितना 'फ्रेश' है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह पैसा भारतीय बैंकिंग सिस्टम में बिल्कुल नया आया है या फिर मौजूदा डिपॉजिट्स के रोलओवर और रिन्यूअल का हिस्सा है। RBI बैंकों से इस बारे में बारीकी से जानकारी जुटा रहा है, लेकिन अभी तक नए और रिन्यूड डिपॉजिट्स की सटीक जानकारी सामने नहीं आई है।

आगे की राह और निगरानी

यह स्वैप फैसिलिटी 30 सितंबर 2026 तक खुली रहेगी। FCNR(B) डिपॉजिट के लिए समय-सीमा तय होने के कारण, बैंकों से उम्मीद है कि वे तीसरी तिमाही के अंत तक विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रयास जारी रखेंगे। हालांकि शुरुआती उम्मीदें इससे ज़्यादा थीं, लेकिन कई एनालिस्ट्स इस मौजूदा स्थिति को बाहरी सेक्टर को स्थिर करने की दिशा में एक सकारात्मक शुरुआत मान रहे हैं।

निवेशकों और मार्केट पार्टिसिपेंट्स को RBI की ओर से आने वाली डिस्क्लोजर्स पर नज़र रखनी चाहिए, ताकि फॉरेन एक्सचेंज लिक्विडिटी पर इन इनफ्लोज़ का नेट इम्पैक्ट पता चल सके। इस उपाय की अंतिम सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह रुपये को कितना स्थायी सपोर्ट देता है और सितंबर की डेडलाइन नजदीक आने पर इनफ्लो की रफ्तार कितनी तेज होती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.